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Innovation: CG में इंजीनियरिंग के छात्रों में बनाया अनोखा डिवाइस, Negativ Emotions को करेगा डिटेक्ट

Chhattisgarh के भिलाई में इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों और प्रोफेसरों ने एक ऐसा डिवाइस तैयार किया है। जिसके बारे में सुनकर आपको भी हैरानी होगी। दरअसल इन छात्रों ने मानसिक तनाव से ग्रस्त लोगों को गलत कदम उठाने से बचाने के लिए 'सुसाइड टेंडेंसी डिटेक्टिंग स्कैनर' नामक एक डिवाइस तैयार की है। इसके माध्यम से ऐसे मामलों में पीड़ितों की मानसिक स्थिति का सही तरीके से अंदाजा लगाया जा सकता है। जिससे पीड़ित को गलत कदम उठाने से रोका जा सकता है।

इस तरह के मामलों में उपयोगी साबित होगा डिवाइस

इस तरह के मामलों में उपयोगी साबित होगा डिवाइस

बदलते समाजिक परिवेश के साथ बच्चों और युवाओं में बढ़ रहे आत्महत्या के मामलों में तेजी आई है इसके आलवा अधिकतर लोग पारिवारिक झगड़े, पति पत्नी में आपसी तनाव या फिर कर्ज के बोझ, पढ़ाई का स्ट्रेस, प्यार में धोखा, व्यापार में घाटा, सार्वजनिक अपमान, जैसी बातों में आकर खुद को नुकसान पहुंचाने या फिर गलत कदम उठाने की कोशिश करते हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति के मन में नकारात्मक बातें तेजी से चलने लगती है। यही नकारात्मक विचार व्यक्ति को गलत कदम उठाने के लिए मजबूर करता रहता है। लेकिन अगर सही समय में मानसिक तनाव या अवसाद से ग्रस्त व्यक्ति का पहले ही पता लगाकर उसे सही मार्गदर्शन या काउंसलर मिल जाए तो कई लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है।

एक पैन के आकार का होता है डिवाइस

एक पैन के आकार का होता है डिवाइस

इस डिवाइस को एक पैन की तरह डिजाइन किया गया है। जिससे व्यक्ति को इसके होने का एहसास भी नहीं होगा और वो काउंसलर या किसी व्यक्ति को अपत्नी तकलीफ खुलकर बता सकेगा। इसकी खास बात यह है कि काउंसलिंग के दौरान पीड़ित के पास ही रखा होगा।लेकिन इस डिवाइस की जानकारी भी नहीं लगेगी। दोनों की बातचीत के दौरान यह डिवाइस पीड़ित व्यक्ति और काउंसलर के सवाल जवाब को डिटेक्ट करता रहता है। इसे सुसाइड टेंडेंसी डिटेक्टिंग स्केनर नाम दिया गया है।

भारत सरकार ने इंजीनियरों को दिया डिवाइस का पेटेंट

भारत सरकार ने इंजीनियरों को दिया डिवाइस का पेटेंट

इस डिवाइस को युवा इंजीनियर और प्रोफेसरो ने केंद्र सरकार के पेटेंट कार्यालय से पेटेंट भी करवाया है। भारत सरकार के पेटेंट विभाग ने इस डिवाइस की विश्वनियता और भविष्य में मनुष्य के लिए इसकी उपयोगिता के सभी पहलुओं की जांच है। जिसके बाद इस डिवाइस का पेटेंट रुंगटा इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों को दिया है। इस डिवाइस को बनाने वाले प्रोफेसर और छात्रों यह डिवाइस स्कूल, कॉलेज, पुलिस विभाग, अस्पताल, जैसे सार्वजनिक संस्थानों में उपयोगी होग। इसकी सहायता से डिप्रेशन से परेशान लोगों की मॉनिटरिंग करके उन्हें सुसाइड की तरफ जाने से पहले ही रोका जा सकेगा इस को तैयार करने में कॉलेज के फैकल्टी अजय कुशवाहा, डॉ. साजिया इस्लाम, प्रोफेसर मीनू चौधरी, प्रोफेसर दीप्ति शर्मा, प्रोफेसर नीलाभ साव और अनीशा सोनी ने मिलकर इसे तैयार किया है।

इस तकनीक से हुआ है स्कैनिंग डिवाइस का निर्माण

इस तकनीक से हुआ है स्कैनिंग डिवाइस का निर्माण

प्रोफेसर नीलाभ साव ने बताया कि इस डिवाइस को तैयार करने के लिए विशेष रूप से मशीन लर्निंग कोडिंग और आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस का प्रयोग किया गया है। इसमें विशेष कोडिंग के जरिए प्रोग्राम डाले गए हैं जिसमें कई करोड़ एक्सप्रेशन (भाव) और बिहेवियर(व्यवहार) के सैम्पल को फीड किया गया हैं। जिसे स्कैन करते ही स्कैनर पीड़ित के मनोभाव की जानकारी देता है। डिवाइस में लगा एक मिनी कैमरा पीड़ित की चेहरे को स्कैन करता है। साथ ही बातचीत के दौरान आने वाले उतार चढ़ाव को ग्राफिक्स में बदलता है।

सभी तरह के भावनाओं को रीड करता है डिवाइस

सभी तरह के भावनाओं को रीड करता है डिवाइस

इस डिवाइस की मदद से आत्महत्या करने के लिए मनुष्य के दिमाक में आवश्यक प्रतिशत मालूम किया जा सकता है। इसमें व्यक्ति के मन की स्थिती और उसके भीतर चल रहे भावों के उतार-चढ़ाव का ग्राफिक आउटपुट मिलता है। यह डिवाइस पीड़ित की बात को सुनकर, बोल रहा व्यक्ति खुश है या नाराज परेशान, तनाव, डरने या घबराने जैसी स्थिति का भी आकलन करता है। यही नहीं यह छोटा सा डिवाइस सोशल मीडिया पोस्ट यह हाथ में लिखे गए लेटर राइटिंग को पढ़कर भी उसकी इमोशनल स्थिति को डिटेक्ट कर सकता है। पोस्ट में व्यक्ति ने कितने नेगेटिव और पॉजिटिव वर्ड्स लिखे हैं। यह एक क्लिक में बता सकता है।

सार्वजनिक संस्थानों में उपयोगी साबित होगी डिवाइस

सार्वजनिक संस्थानों में उपयोगी साबित होगी डिवाइस

काउंसलर के सवाल और पीड़ित के जवाब सुनकर चेहरे के हाव-भाव, बॉडी लैंग्वेज को सभी तरह से डिटेक्ट करने के बाद डिवाइस टेंडेंसी का ग्राफ बताता है। जिसके आधार पर उसे आगे डॉक्टर, काउंसलर या फैमिली आदि को भेजा जा सकता है। कॉलेज प्रबंधन अब इस डिवाइस का टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने जा रही है। इस डिवाइस को तैयार करने में एक निजी कम्पनी ने भी रुचि दिखाई है। रिसर्च करने वाले प्रोफेसरों और रुंगटा कॉलेज मैनेजमेंट ने इस डिवाइस को अस्पताल, स्कूल और कॉलेजों को टेस्टिंग के लिए सौंपने जा रही है। इससे पुलिस विभाग को ही मदद मिलेगी साथ ही अन्य विभाग के लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा इसमें आत्महत्या के मामलों में रोकने में सहायता मिल सकेगी

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