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पहले गोबर से बनाई खाद ,अब गौमूत्र से कीटनाशक बनाएगी छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार !

रायपुर ,25 फरवरी। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार पहले से ही गोबर से खाद और बिजली बना रही है,लेकिन अब सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए गौमूत्र से कीटनाशक तैयार कर सकती है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद इस मामले में बेहद गंभीर है।

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मिली जानकारी के मुताबिक भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में कृषि के क्षेत्र में गोमूत्र के वैज्ञानिक और व्यवस्थित उपयोग की कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को राज्य के कृषि वैज्ञानिकों, गोमूत्र का रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों के बदले उपयोग करने वाले कृषकों और कामधेनु विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से चर्चा कर कृषि में गोमूत्र के वैज्ञानिक उपयोग की संभावनाओं के संबंध में कार्ययोजना तैयार कर दो सप्ताह में प्रस्तुत करने को कहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि रासायनिक खादों एवं विषैले कीटनाशकों के निरंतर प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति निरंतर कम होती जा रही है। खेती में रसायनों के अत्यधिक उपयोग से जनसामान्य के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। राज्य के गौठानों में निर्मित वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट का उपयोग आरंभ करने के सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं और छत्तीसगढ़ ऑर्गेनिक एवं रिजनरेटिव खेती की ओर आगे बढ़ रहा है। इसी तरह कृषि में जहरीले रसायनों के उपयोग के विकल्प के रूप में 'गोमूत्र' के उपयोग की अपार संभावनायें हैं। राज्य के ही कुछ स्थानों में गोमूत्र के सफलतापूर्वक उपयोग के उदाहरण मौजूद है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि आवश्यकता इस बात की है कि गोमूत्र के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के पूर्व इस दिशा में अब तक देश में हुए शोध का संकलन भी किया जाना चाहिए।

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यह भी जानना जरुरी है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार ने सुराजी गांव योजना के तहत प्रदेशभर में हजारों गौठान बनाकर उसमे आवारा मवेशी के तौर पर घूमने वाली गायों को रखा है। इन्ही गौठानों के माध्यम से गौधन न्याय योजना के तहत ग्रामीणों से गोबर खरीदी की जा जाती है, सरकार गोबर के एवज में ग्रामीण पशुपालकों को पैसों का भुगतान करती है।गोबर से गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट खाद का उत्पादन एवं विक्रय किया जाता है।

सुराजी गांव योजना के माध्यम से निर्मित गौठान और गोधन न्याय योजना से ग्रामीणों को फायदा पहुंच रहा है। वही सरकार का दावा है कि गोबर से बनने वाली खाद के कारण प्रदेश में जैविक खाद का इस्तेमाल बढ़ रहा है और प्रदेश पूर्व जैविक खेती करने वाले ऑर्गनिक फार्मिंग स्टेट के तौर पर पहचान बना रहा है। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनने से भी अर्थव्यवस्था सुधरी है।

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