Ambikapur की महिला ऑटो चालक गीता ने बनाई "गुलाबी नारी शक्ति", घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं का बनी सहारा

Ambikapur Women Auto Driver गीता सिंह को सभी जानते हैं। आज से सात साल पहले जब छत्तीसगढ़ में गीता ने महिला ऑटो चालक के रूप में समाज में अपनी पहचान बनाई, तो सभी उनके इस जज्बे को सलाम करने लगे। लेकिन गीता आज अम्बिकापुर के सैकड़ों महिलाओ के लिए मिसाल बन चुकी हैं। क्योंकि अब गीता अम्बिकापुर की उन महिलाओं की मदद के लिए आगे आ रहीं। जो घरेलू हिंसा के शिकार होती है।

गीता ने बनाया ''गुलाबी नारी शक्ति'' संगठन

गीता ने बनाया ''गुलाबी नारी शक्ति'' संगठन

गीता आज ऑटो चलाकर स्वयं के परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। और इसके साथ साथ गरीब महिलाओं की मदद भी कर रहीं हैं। गीता ने महिलाओं को सशक्त बनाने "गुलाबी नारी शक्ति" का गठन किया है। इस संगठन में लगभग 3000 से अधिक महिलाएं सदस्य हैं। जो ग्रामीण इलाकों या दूसरे क्षेत्रों की महिलाओं की मदद कर रही हैं। संगठन की अध्यक्ष गीता बताती हैं, कि इस संगठन के माध्यम से उन महिलाओं की मदद की जाती है। जो पति से प्रताड़ित, घर से भागी हुई, दहेज के लिए प्रताड़ित है। इसके साथ ही महिलाओं को कानूनी रूप से न्याय दिलाने के लिए "गुलाबी नारी शक्ति" के सदस्य मदद करतें हैं।

पुरुषों से कम नहीं महिलाएं, घर चलाना पति-पत्नी दोनो की जिम्मेदारी

पुरुषों से कम नहीं महिलाएं, घर चलाना पति-पत्नी दोनो की जिम्मेदारी

अम्बिकापुर की पहली महिला ऑटो चालक गीता सिंह कहतीं हैं कि महिलाएं पुरुषों से कम नहीं हैं। आज भी वे पुरुषों की तरह अपने परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। हां अकेले पति के कंधे पर घर चलाने का बोझ नही होना चाहिए। पति पत्नी को मिलकर यह जिम्मेदारी उठानी चाहिए। ऑटो चालक गीता सिंह जो पिछले 7 साल से शहर में ऑटो चला रहीं हैं, और इसके साथ-साथ महिलाओं को अपने अधिकार के लिए लड़कर, पुरुष प्रधान समाज में कंधे से कंधा मिलाकर चलना सिखा रही हैं।

आर्थिक तंगी से गुजरा परिवार, तब गीता बन गई ऑटो चालक

आर्थिक तंगी से गुजरा परिवार, तब गीता बन गई ऑटो चालक

दरअसल महिला ऑटो चालक गीता सिंह का परिवार कभी आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। इस तंग हाल जिंदगी से बाहर निकलने के लिए गीता ने खुद ऑटो का हैंडल अपने हाथों में लेने की ठानी। जिसके बाद गीता ने खुद ऑटो चलाना सीखा अब इस बात को भले ही 7 साल बीत चुके हैं। लेकिन गीता अब अपने साथ-साथ समाज के उन महिलाओं के लिए भी मिसाल पेश कर रही हैं। जो स्वयं को कमजोर मानती हैं। गीता को सरगुजा संभाग के ऑटो यूनियन की संभागीय अध्यक्ष भी बनाया गया था।

गीता ने सिखाया 20 महिलाओं को ऑटो चलाना

गीता ने सिखाया 20 महिलाओं को ऑटो चलाना

आज शहर की 100 से अधिक महिलाएं गीता से प्रेरित होकर स्वरोजगार कर रही हैं। तो गीता को देखकर 20 महिलाएं अब तक ऑटो चालक बन चुकी हैं। इस सभी को गीता ने ही ऑटो चलाना सिखाया। वही ये सभी महिलाएं स्वयं ऑटो चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। अब यह महिला ऑटो चालक आत्मनिर्भर होकर शहर में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ऑटो चला रही है वही गीता इनके लिए मिसाल बन चुकी हैं। सरगुजा जिले का अंबिकापुर प्रदेश का एकमात्र ऐसा शहर है, जहां पर महिलाएं ऑटो चलाती हैं।

सम्मान तो बहुत मिला लेकिन, नहीं मिल सका योजना का लाभ

सम्मान तो बहुत मिला लेकिन, नहीं मिल सका योजना का लाभ

गीता के संघर्ष को देखते हुए कई जनप्रतिनिधियों ने गीता को सम्मानित किया है। महिला दिवस , श्रम दिवस या फिर अन्य मौकों पर गीता को सम्मानित किया जाता है। पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह भी गीता को सम्मानित कर चुके हैं। उसे दंतेवाड़ा रायपुर, जगदलपुर, कोरिया, बलरामपुर जिले में ही कॉलेज, जेल और पुलिस विभाग से सम्मान मिला है। गीता कहती है कि महिला ऑटो चालक के रूप में सम्मान तो सभी ने किया लिया । सरकार की योजनाओं का लाभ एभी तक नहीं मिल सका।

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