छत्तीसगढ़ में कुलपति चयन पर विवाद,राजभवन और सीएम हाउस के बीच बढ़ा टकराव
रायपुर ,21 फरवरी । छत्तीसगढ़ में एक विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति का मुद्दे ने इतना बड़ा बखेड़ा खड़ा कर दिया है कि राजभवन और सीएम हाउस के बीच तनाव साफ़ नजर आ रहा है, इतना ही नहीं अब इस मामले में विपक्ष भी कूद गया है। दरअसल कांग्रेस सरकार छत्तीसगढ़ के एकमात्र कृषि विश्वविद्यालय में स्थानीय कुलपति की नियुक्ति किये जाने के पक्ष में है,जबकि राज्यपाल अनुसुइया उईके सरकार के आदेश के बाद राज्य के बाहर से आये डॉ एस. एस.सेंगर को विश्वविद्यालय का प्रभारी प्रमुख बनाया गया है।

स्थानीय कुलपति की मांग, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच तनाव
दरअसल इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रहे डॉ एस के पाटिल हाल ही में रिटायर्ड हुए हैं ,जिनके बाद डॉ. एस. एस. सेंगर को विश्वविद्यालय का प्रभारी प्रमुख बनाया गया था।छात्रों और स्टाफ ने स्थानीय कुलपति नियुक्त किये जाने की मांग की है,जिसका समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओ की कमी नहीं है और छात्रों की मांग जायज़ है,इसपर राज्यपाल को विचार करना चाहिए।
क्योंकि विश्वविद्यालओं में कुलपति की नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल के पास होता है लिहाजा राज्यपाल पर ही सबकी नजर टिकी हुई है। इधर राज्यपाल अनुसुईया उईके का कहना है कि छत्तीसगढ़ के 14 विश्वविद्यालयों में केवल एक समुदाय से संबंधित व्यक्तियों को कुलपति बनाया गया है,इसलिए अन्य राज्य के समुदायों को भी अवसर मिलना चाहिए। राज्यपाल के इस बयान के बाद सीएम भूपेश बघेल ने कहा था कि राज्यपाल सवैधानिक प्रमुख गई इसलिए उनको कृषि विश्वविद्यालय के मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए और लोगों की मांग पर ध्यान देना चाहिए।

डॉ. रमन सिंह ने केटीएस तुलसी के बहाने साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कहा कि विश्वविधालय में कुलपति चयन करना राज्यपाल का अधिकार है। कांग्रेस इस मुद्दे पर राजनीति की जा रही है। कांग्रेस के मुखिया छत्तीसगढ़ के नाम पर केवल अपने रिश्तेदारों और ख़ास लोगों को लाभ पहुँचाना चाह रहे, इसीलिए ऐसा प्रपंच रचा जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने कहा कि छतीसगढ़ के लोगों में प्रतिभा की कमी नही है। यही कारण है कि अभी 14 विश्वविधालयों में 9 कुलपति स्थानीय ही हैं। सभी ने अपनी प्रतिभा से अपना स्थान बनाया है। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि ,अच्छा होता कि कांग्रेस सरकार राज्यसभा सांसद के रूप केटीस तुलसी, जो कभी छतीसगढ़ आते भी नही, के बदले किसी स्थानीय व्यक्ति को राज्यसभा भेजती।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. सिंह ने कहा कि सीएम बघेल को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कांग्रेस आगे तुलसी जैसी ग़लती न दुहराते हुए जब भी अवसर आये, तब राज्यसभा के लिए राज्य के स्थानीय निवासी को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह गांधी परिवार के वफ़ादारों को छत्तीसगढियों का हक़ छीन कर देना निहायत ही अनुचित है।

भाजपा छत्तीसगढ़ियों की उपेक्षा के षड्यंत्र में शामिल:सुशील आनंद शुक्ला
पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि स्थानीय प्रतिभाओं की उपेक्षा के भाजपाई षड्यंत्र का खुलासा हो गया है ।भाजपा के खिलाफ बन रहे माहौल से घबरा कर भले रमन सिंह स्थानीय कुलपति नियुक्ति की बात कर रहे है , लेकिन उनके बयान केसे साफ हो रहा कि संघी विचारधारा के व्यक्तियों को कुलपति बनवाने के लिए पूरी भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ियों की उपेक्षा के षड्यंत्र में शामिल है । कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि राज्यसभा सांसद के.टी.एस तुलसी के चुनाव का हवाला देकर रमन सिंह कुलपतियों की नियुक्ति में स्थानीय की उपेक्षा को सही साबित करने की कुचेष्टा कर रहे है ।कुलपति चयन को राजनैतिक्र चयन से जोड़ना उचित नही है ।नरेंद्र मोदी गुजरात से बनारस चुनाव लड़ने पहुच गए ।स्मृति ईरानी अमेठी चुनाव लड़ने गयी, यह भाजपा की राजनैतिक रणनीति है। वैसे ही केटीएस तुलसी को राज्य सभा भेजना कांग्रेस की राजनैतिक रणनीति है ।
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