छत्तीसगढ़: सुकमा में फैल रही है अनजान बीमारी, एक गांव हो चुका है तबाह, दूसरे की तरफ बढ़े कदम
छत्तीसगढ़ के सुकमा में अनजान बीमारी से बीते ढाई साल में 61 लोगों की जान चले जाने के मामले में स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव तक अभी तक शासन ने रिपोर्ट तलब नहीं की है।
सुकमा, 01 अगस्त । छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सुकमा में अनजान बीमारी से बीते ढाई साल में 61 लोगों की जान चले जाने के मामले में स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव तक अभी तक शासन ने रिपोर्ट तलब नहीं की है। इधर चिंता की बात यह है कि यह बीमारी ग्राम रेंगड़गट्टा से निकलकर दूसरे गांवो में भी पहुँच चुकी है। बस्तर के आदिवासी बाहुल्य सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा से कांग्रेस सरकार के आबकारी मंत्री कवासी लखमा विधायक हैं,इसलिए इस मामले में सियासत भी शुरू हो गई है।

ढ़ाई साल के भीतर 61 ग्रामीणों की मौत
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंंटा तहसील में जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर स्थित रेगड़गट्टा नाम के गांव में लगभग ढ़ाई साल के भीतर 61 ग्रामीणों की मौत हो गई है,जबकि यह सिलसिला थमा नहीं हैं,क्योंकि गांव में काफी लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। इधर चिंतागुफा स्थित स्वास्थ्य केन्द्र से लगभग 8 किमी दूर रामाराम गांव में भी हाथ पांव सूजन से पीड़ित मरीज मिले हैं।
बताया जा रहा है कि रेगड़गट्टा में फैली बीमारी की तरह की लक्षण मरीजों में मिल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जून के महीने में इसी बीमारी से रामराम निवासी दुधी कोसा की मौत हो चुकी है,जबकि दुधी कोसा, दुधी दुये, दुधी पाली, वेट्टी हिड़मा और दुधी सुक्का नाम के ग्रामीण इस बीमारी से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य अमला ग्रामीणों से जांच सेंपल लेकर लौट चुकी है।

स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव को भी रिपोर्ट का इंतज़ार
सुकमा में फैली इस अज्ञात बीमारी का मामला प्रकाश में आये लगभग एक सप्ताह का समय बीत चुका हैं,लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग बीमारी की पहचान नहीं कर सका है और ना ही जांच की कोई रिपोर्ट सामने आई है। वन इंडिया संवाददाता धीरेन्द्र गिरि गोस्वामी ने जब छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव से इस संबंध में जानकारी चाही, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी है,यह कोई एक बीमारी के कारण हो रहा है ऐसा नहीं लगता,मामले की जांच करवाई जा रही है,जैसे ही उन्हें रिपोर्ट मिलेगी,तो वह इसपर जानकारी उपलब्ध करवाएंगे।

हाथ पैर में आती है सूजन,फिर चली जाती है जान
बताया जा रहा है कि इस गांव में ग्रामीणों को हाथ पांव में सूजन हो रही है,जिसके बाद बीमारी बढ़ जाने के बाद मौते हो रही हैं। बुधवार की शाम कम्युनिस्ट नेता रामा सोढ़ी की अगुवाई में ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने सुकमा पहुंचकर कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को इसकी जानकारी दी थी । ग्रामीणों ने इस संबंध में प्रशासन ज्ञापन भी सौपा है, जिसमें बीते तीन साल में हुई मृत्यु का आंकड़ा दिया गया है। ग्रामीणों ने कलेक्टर को बताया कि उनके गांव में हाथ पैर में सूजन की अनजान बीमारी से साल 2020 से 2022 तक 61 लोगो की जान जा चुकी है।

2022 में अब तक 24 की जान गई
रेगड़गट्टा के ग्रामीणों का कहना है कि पहले इस बीमारी से लोगों के हाथ और पांव में सूजन आ रही है,फिर पेट फूलता है,जिसके बाद दिनों दिन हालत गंभीर होने के बाद मरीज की मौत हो जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव में इस बीमारी से साल 2020 में 18,2021 में 19 फिर उसके बाद 2022 में अब तक 24 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। मंत्री कवासी लखमा भी रहे अनजान ग्रामीण बताते है कि इस अनजान बीमारी की वजह से रिश्तेदारों ने भी उनके गांव में आना जाना बंद कर दिया है,जिससे उनका सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है। अचरज की बात है कि इस क्षेत्र के विधायक सरकार के वरिष्ठ मंत्री कवासी लखमा हैं,जिन्हे खुद अब तक इस समस्या के बारे में जानकारी नहीं थी।

भाजपा ने उठाये सवाल
छत्तीसगढ़ सरकार के आबकारी मंत्री कवासी लखमा कोंटा से ही विधायक हैं,इसी क्षेत्र के गांव में ढाई साल में 61 लोगों की जान चली जाने पर विपक्ष ने सवाल उठाये हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु देव साय ने बस्तर के सुकमा जिले के कोंटा इलाके के रेगड़गट्टा गांव में 61 लोगों की अज्ञात बीमारी से मौत को राज्य सरकार की संवेदनहीनता का परिणाम बताते हुए कहा है कि इस गांव में हाथ पैर में सूजन से पीड़ित लोग मौत के मुंह में समाते गए और सरकार बेखबर रही। अविश्वास प्रस्ताव की बहस के दौरान भूपेश बघेल सरकार की तथाकथित उपलब्धि का कीर्तन करने वाली कांग्रेस मंडली इन मौतों को भी अपनी उपलब्धियों की लिस्ट में सबसे ऊपर रख ले।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा कि कांग्रेस के मंत्री के क्षेत्र में ढाई साल से लोग अज्ञात बीमारी से ग्रस्त होकर अकाल मौत मर रहे हैं और यहां बस्तर को स्वर्ग से सुंदर बनाने के दावे ठोके जाते रहे।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा कि जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरगुजा से अपना प्रायोजित भेंट मुलाकात कार्यक्रम शुरू किया, उसी समय उनके प्रतिद्वंद्वी टीएस सिंहदेव ने स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर बस्तर में समीक्षा के नाम पर सियासी दौरा किया। तब उन्हें अपने साथी मदिरा मंत्री के इलाके में फैली इस बीमारी की भनक क्यों नहीं लगी?












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