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CG: रतनजोत के बीज खाकर स्कूली बच्चे बीमार, बायोफ्यूल बनाने पूर्व भाजपा सरकार ने खर्च किए थे 500 करोड़

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में 5 स्कूली बच्चे रतनजोत के बीज खाकर बीमार पड़ गए जिनका इलाज स्थानीय अस्पताल में कराया गया,पूर्व BJP सरकार में प्रदेश को बायोडीजल में आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगभग 500 करोड़ खर्च खर्च किए थे।
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छत्तीसगढ़ में रतनजोत के पौधे लगाकर पूर्व भाजपा सरकार ने रिकार्ड बनाया था। लेकिन आज यही पेड़ बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहें हैं। बेमेतरा जिले के नवागढ़ ब्लाक के प्राथमिक स्कूल हरिहरपुर में 5 बच्चे रतनजोत के बीज खाकर बीमार पड़ गए। बच्चों का इलाज स्थानीय अस्पताल में कराया गया। मंगलवार को बच्चों को डिस्चार्ज कर दिया गया।

समुदायिक अस्पताल में चल रहा था इलाज

समुदायिक अस्पताल में चल रहा था इलाज

नवागढ़ ब्लाक के हरिहरपुर में रतनजोत बीज को बच्चों ने फल समझकर खा लिया, जानकारी के अनुसार गांव के प्राथमिक स्कूल में बाउंड्री वॉल नहीं है। जिसके चलते बच्चे खेलते हुए पास ही खेत में लगे रतनजोत के पौधे के पास पहुंचे। रतनजोत के बीज खाने के करीब करीब 5 घंटे बाद बच्चों को उल्टियां शुरू हो गई, तो परिजन घबरा गए। शुरुआत में मितानिन ने उल्टी की दवा दे दी। लेकिन रात में तबियत बिगड़ने लगी। जिसके बाद मितानिन ने संजीवनी 108 की मदद से उन्हें सामुदायिक अस्पताल पहुंचाया।

बीईओ ने बच्चों के स्वास्थ्य की ली जानकारी

बीईओ ने बच्चों के स्वास्थ्य की ली जानकारी

इन बच्चों के बीमार पड़ने की सूचना पर शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया रात में बीईओ लोकनाथ बांधे और पुलिस की टीम को सूचना दी गई। जिसके बाद बाकी बच्चों के घरों में पहुंचकर बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली गई। बाकी भच्चे बच्चे भोजन कर सो रहे थे। तब भी बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया। रात भर डॉक्टरों की निगरानी में बच्चों को रखा गया। दूसरे दिन सबको इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया।

12 साल में खर्च किये थे 500 करोड़

12 साल में खर्च किये थे 500 करोड़

दरअसल पूर्व भाजपा सरकार ने प्रदेश को डीजल ईंधन के मामले में आत्मनिर्भर होने का सपना दिखाया था। साल 2006 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने वृक्ष मित्र अभियान के जरिए राज्य में 1650 वर्ग किलोमीटर में मनरेगा के तहत रतनजोत पौधे लगाकर रिकॉर्ड बनाया था। इस योजना पर 12 सालों में लगभग 500 करोड़ रुपये खर्च किये गए। 50 लाख की लागत से बायोडीजल प्लांट भी लगाया गया। सरकार का दावा था कि साल 2014 तक डीजल के मामले में छत्तीसगढ़ आत्म निर्भर होगा। लेकिन यह योजना पूरी तरह फ्लॉप रही।

लगाए गए थे करोड़ो रुपये के पौधे

लगाए गए थे करोड़ो रुपये के पौधे

कबीरधाम जिले में भी करीब 3 करोड़ रुपए खर्च कर रतनजोत के पौधे लगाए गए थे। इसके अलावा राजनांदगांव, दुर्ग, महासमुंद, बेमेतरा में करोड़ो खर्च कर पौधे लगाए गए थे। रेलवे की भूमि और भी पौधे रोपे गए थे। लेकिन देखरेख के अभाव में अधिकतर पौधे मर गए। लेकिन बचे पौधे बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहें हैं। इससे राज्य के लगभग सभी जिलों में इस बीज को खाने से बच्चों के बीमार होने की कई घटनाएं सामने आ चुकी है।

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English summary
chhattisgarh: children fell ill after eating Ratanjot seeds, BJP government had spent 500 crores before making biofuel
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