रामदेव की बढ़ी मुश्किलें, IMA ने रायपुर में दर्ज कराया मामला
रायपुर, जून 17: योग गुरु रामदेव की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। डॉक्टरों के खिलाफ गैरजिम्मेदाराना बयान देने पर उनके खिलाफ छत्तीसगढ़ में एफआईआर दर्ज हुई है। छत्तीसगढ़ पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि रायपुर में पुलिस ने योग गुरु रामदेव के खिलाफ कोविड -19 के इलाज के लिए चिकित्सा बिरादरी द्वारा इस्तेमाल की जा रही दवाओं के बारे में "झूठी" जानकारी फैलाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है।
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रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय यादव ने बताया कि भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) की छत्तीसगढ़ इकाई की शिकायत के आधार पर बुधवार रात रामकृष्ण यादव उर्फ बाबा रामदेव के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि, रामदेव के खिलाफ धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत आदेश की अवज्ञा), 269 (जीवन के लिए खतरनाक बीमारी के संक्रमण को फैलाने की लापरवाही से काम करना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) और आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51, 52, 54 में मामला दर्ज किया गया है।
अस्पताल बोर्ड आईएमए (सीजी) के अध्यक्ष डॉ राकेश गुप्ता, आईएमए के रायपुर अध्यक्ष और विकास अग्रवाल उन डॉक्टरों में शामिल थे जिन्होंने पहले शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, पिछले एक साल से, रामदेव कथित रूप से चिकित्सा बिरादरी, भारत सरकार, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और अन्य अग्रिम पंक्ति के संगठनों द्वारा कोरोना वायरस संक्रमण के उपचार में उपयोग की जा रही दवाओं के खिलाफ सोशल मीडिया पर झूठी सूचना का प्रचार कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर उनके कई वीडियो हैं जिनमें उन्होंने कथित तौर पर इस तरह की भ्रामक टिप्पणी की हैं। शिकायत में कहा गया है कि ऐसे समय में जब डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और सरकार और प्रशासन की सभी शाखाएं मिलकर कोविड-19 से जूझ रही हैं,तब रामदेव कथित तौर पर स्थापित और स्वीकृत उपचार विधियों के बारे में लोगों को गुमराह कर रहे हैं। वहीं जांच अधिकारी ने कहा कि, शिकायत की जांच के दौरान, यह पाया गया कि उनके बयान छत्तीसगढ़ सरकार की पिछले साल 13 मार्च की अधिसूचना का उल्लंघन करते हैं।
उन्होंने बताया कि शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रामदेव की भ्रम पूर्ण जानकारी और वक्तव्य के कारण आधुनिक चिकित्सा पद्धति के प्रयोग से 90 फीसदी से ज्यादा ठीक हो रहे मरीज आशंका की स्थिति में आ जाएंगे और उनकी जान को खतरा हो जाएगा। इससे ना केवल पूरा चिकित्सक पैरामेडिकल वर्ग उद्वेलित आक्रोशित है बल्कि देश में विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करने में हतोत्साहित भी हो रहा है।












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