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बीजापुर में नक्सलियों का खूनी खेल जारी, दो ग्रामीणों की हत्या से फैला दहशत का माहौल

Chhattisgarh Naxal Attack: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से एक बार फिर नक्सली हिंसा की दर्दनाक खबर सामने आई है। जिले के तर्रेम थाना क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में दो ग्रामीणों की नक्सलियों ने बेरहमी से हत्या कर दी। यह हत्याएं रविवार और सोमवार की दरमियानी रात को हुईं। पुलिस ने सोमवार को इसकी पुष्टि की।

बीजापुर पुलिस (Bijapur Police) की ओर से जारी बयान के मुताबिक, मारे गए ग्रामीणों की पहचान कवासी जोगा (55 वर्ष), निवासी छुटवाई गांव, और मंगलू कुसराम (50 वर्ष), निवासी बड़ा तर्रेम गांव, के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा बलों की टीम सुबह मौके पर रवाना की गई और पूरे क्षेत्र को घेराबंदी में लेकर तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है।

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मुखबिरी के शक में उतारा मौत के घाट

पुलिस का कहना है कि दोनों हत्याओं की प्रारंभिक जांच की जा रही है और विस्तृत जानकारी जल्द साझा की जाएगी। हालांकि, शुरूआती जानकारी के अनुसार, नक्सलियों ने दोनों ग्रामीणों को पुलिस का मुखबिर होने के शक में मौत के घाट उतारा।

यह माओवादी संगठनों की एक पुरानी रणनीति है, जिसके तहत वे ग्रामीणों को डराने और सुरक्षा बलों के खिलाफ दहशत फैलाने के लिए इस तरह की हिंसक वारदातों को अंजाम देते हैं।

बस्तर में बढ़ रही माओवादी हिंसा - साल 2025 में अब तक 27 की मौत

बस्तर क्षेत्र, जिसमें बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर जिले शामिल हैं, में माओवादी हिंसा लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025 की शुरुआत से अब तक 27 लोगों की जान माओवादी हमलों में जा चुकी है। इन घटनाओं में अधिकतर पीड़ित स्थानीय ग्रामीण रहे हैं, जिन्हें माओवादी या तो मुखबिर समझते हैं या अपनी गतिविधियों में बाधा मानते हैं।

पिछली घटनाओं पर एक नजर ...

यह पहली बार नहीं है जब बीजापुर जिले में नक्सलियों ने आम नागरिकों को निशाना बनाया है।

  • 14 जुलाई की रात, नक्सलियों ने बीजापुर के फर्शेगढ़ इलाके में दो 'शिक्षा दूत' (अस्थायी शिक्षक) की हत्या कर दी थी। उन पर आरोप था कि वे पुलिस के लिए मुखबिरी कर रहे थे।
  • 21 जून को बीजापुर के पामेड़ थाना क्षेत्र में दो ग्रामीणों को मौत के घाट उतार दिया गया।
  • इससे पहले 17 जून को नक्सलियों ने बीजापुर के पेड्डाकोर्मा गांव में तीन ग्रामीणों - जिनमें एक 13 साल का बच्चा भी शामिल था - को रस्सी से गला घोंटकर बेरहमी से मार डाला। इनमें से दो मृतक वरिष्ठ माओवादी नेता दिनेश मोदीयम के रिश्तेदार थे, जिन्होंने मार्च 2025 में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।

पुलिस प्रशासन का आश्वासन

बस्तर क्षेत्र दशकों से माओवादी गतिविधियों से पीड़ित है। आए दिन ग्रामीणों को पुलिस मुखबिर बताकर निशाना बनाया जाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास से जुड़े कार्यों को बाधित किया जाता है। नक्सलियों की यह हिंसा न सिर्फ इंसानी जानों की बलि ले रही है, बल्कि स्थानीय आबादी के मन में डर और अविश्वास का माहौल भी बना रही है।

राज्य सरकार और सुरक्षा बलों के संयुक्त अभियान के बावजूद इस प्रकार की घटनाएं यह दिखाती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में माओवादियों की पकड़ अब भी गंभीर चिंता का विषय है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि इस घटना की गहराई से जांच की जा रही है और दोषियों को जल्द ही पकड़कर न्याय दिलाया जाएगा। वहीं, राज्य सरकार ने भी कहा है कि वह माओवाद के खिलाफ अपनी रणनीति और तेज करेगी, ताकि ऐसी घटनाओं की दोबारा ना हो।

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