Chhattisgarh: Tiger बम से किया प्रयोग, जगत हुआ हादसे का शिकार, Diwali की खुशियां मातम में बदली
Deepawali पर पटाखे जलाकर खुशियां मनाने की परंपरा है। लेकिन कभी कभी ये पटाखे बच्चों के लिए घातक बन जाते है। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में दीपावली पर टॉप टाइगर पटाखे से प्रयोग करना एक बच्चे को भारी पड़ गया। जिले में दिवाली के दिन फटाका जलाने के दौरान हुए हादसे में घायल किशोर को अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन इलाज के दौरान बालक ने दम तोड़ दिया।

दोस्तों ने पहुंचाया अस्पताल, लेकिन नहीं बच पाई जान
गिलास के टुकड़ा सीने में लगते ही जगतेश बेहोश हो गया और वहीं गिर गया। आनन-फानन में उसके दोस्त उसे गम्भीर हालत में पास के अस्पताल ले गए। जहां से रात में ही डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन तब तक काफी खून बह चुका था। जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मां की मौत, पिता बेरोजगार, परिवार के साथ रहता था जगत
दरअसल यह पूरा मामला कोरिया जिले के चरचा थाना क्षेत्र का है। जहां शहर के बैकुंठपुर इलाके में जगतेश अपने एक रिश्तेदार के साथ रहता था। उसकी 2 छोटी बहनें भी एक अन्य रिश्तेदार के साथ रहती थी। मां की मौत हो चुकी है, पिता कोई काम नहीं करते। जगत भी 10वीं तक पढ़ाई करने के बाद इधर उधर घूमता रहता था। जगत दीपावली की रात अपने दोस्तों के साथ दिवाली में पटाखे जला रहा था।

टॉप टाइगर बम में किया प्रयोग, सीने में लगा गिलास का टुकड़ा
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में 16 वर्षीय जगतेश सिंह अपने दोस्तों के साथ दीपावली पर पटाखे जला रहा था। इस दौरान टॉप टाइगर बम को फोड़ने के लिए दोस्तों ने जगत को कुछ नया प्रयोग करने की सलाह दी। जिस पर जगत ने एक स्टील गिलास और ईट लेकर इसमें प्रयोग किया। पहले बम को गिलास से ढका फिर इट से दबा दिया। फिर बम में आग लगाकर जगतेश भाग रहा था कि बम फट गया। गिलास का एक टुकड़ा उसके सीने में घुस गया।

यूट्यूब देखकर बच्चे करते हैं प्रयोग, परिजन रखें सावधानी
दरअसल दीपावली त्यौहार के मौके पर बच्चे पटाखे फोड़ कर खुशियां मनाते हैं। लेकिन कुछ असावधानी के कारण कई बार बच्चे बड़े हादसे के शिकार भी हो जाते हैं। इसके साथ ही यूट्यूब देखकर बच्चे पटाखों पर कई तरह के प्रयोग करते हैं। पटाखों को गलत तरीके से जलाने और उसके हानिकारक प्रभाव से कई तरह के हादसे होते हैं। इसके अलावा पटाखों कि तेज आवाज से बच्चों की सुनने की क्षमता कमजोर हो जाती है। इसके बचाव के लिए परिजनों को बच्चों पर ध्यान रखना जरूरी है।
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