छत्तीसगढ़: बोरवेल में फंसा है मासूम, 100 घंटे से अधिक बीते, देश कर रहा है दुआएं
छत्तीसगढ़ के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में 11 वर्ष के बच्चे राहुल साहू को बोरवेल में फंसे 100 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है ।
जांजगीर चाम्पा, 13 जून। छत्तीसगढ़ के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में 11 वर्ष के बच्चे राहुल साहू को बोरवेल में फंसे 100 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है । बच्चे को बचाने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम लगातार सुरंग बनाने के काम में लगी हुई है। उम्मीद जताई जा रही है कि मासूम राहुल को कभी भी बाहर निकाला जा सकता है। मिली जानकारी के मुताबिक राहुल को गड्ढे से बाहर निकालते ही ग्रीन कॉरिडोर बनाकर उसे इलाज के लिए बिलासपुर के अपोलो अस्पताल ले जाया जायेगा । गौरतलब है कि बच्चे को बचाने के लिए बीते 4 दिन से एनडीआरएफ के जवानो के साथ 300 अधिकारी, कर्मचारी, मजदूर लगे हुए हैं । यहां तक कि बेहद व्यस्तता के बावजूद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद इस पूरे बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं ।
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कैमरे से रखी जा रही है नजर
10 जून की दोपहर छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चाम्पा जिले का गांव पिहरीद में अपने घर की बाड़ी में खेलने के दौरान 11 साल का मासूम राहुल साहू बोर में लगभग 60 फीट नीचे गिरकर फंस गया। घटना की जानकारी गांव में फैलने के बाद ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से मदद मांगी। जिसके बाद घटना की खबर मिलते ही जांजगीर के कलेक्टर जितेन्द्र कुमार शुक्ला और पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल सहित तमाम अधिकारियों का दल घटनास्थल पहुंचा। यह घटना कोई सामान्य घटना नहीं थी। जिला प्रशासन द्वारा बच्चे को बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ सहित आवश्यकता अनुसार सभी से संपर्क बनाया गया।

प्रशासन और एनडीआरएफ के जवानों को सलाम
मासूम राहुल को बचाने के लिए बोरवेल के गड्डे के पास जमा भीड़ हटाने पुलिस फोर्स लगाकर बेरिकेडिंग की गई है । बच्चे को ऊपर लाने का भी प्रयास किया गया, लेकिन असफल होने के बाद रेस्कयू के लिए बड़ी-बड़ी मशीनों के साथ एक्सपर्ट बुलाए गए। भिलाई, कटक, कोरबा, झारखण्ड, रायगढ़, बिलासपुर सहित अन्य स्थानों से भी राहत एवं बचाव के लिए मशीनें तथा वाहन मांगी गई हैं।

राहुल नहीं है सामान्य बालक, इसलिए आई दिक्कतें
बोर के गड्डे में करीब 4 दिनों तक फंसे रहकर भी मौत को मात देने वाला राहुल कोई सामान्य बच्चा नहीं हैं। बच्चा मूक-बधिर होने के अलावा मानसिक रूप से भी कमजोर है, इसलिए उसको बाहर निकालने में काफी समस्याएं पेश आ रही है। बहरहाल बचाव दल के मुताबिक बच्चा हलचल कर रहा है।
बेहद ही मशक्क्त के बाद पोकलेन मशीनों, जेसीबी के माध्यम से सुरंग बनाकर बच्चे को बचाने का प्रयास चलता रहा, वहीं कैमरे की मदद से बच्चे पर लगातार नजर रखकर उसका मनोबल बढ़ाने और खाद्य सामग्रियां पहुचाकर बाहर निकालने की जुगत भी लगाई जा रही है । इस दौरान ऑपरेशन में लगे अमले के अलावा राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी बोरवेल में फंसे राहुल को बाहर लाने के लिए स्वयं पल-पल की जानकारी ले रहे हैं ।

सांप बिच्छू और पानी के बढ़ते स्तर ने बढ़ाई चुनौती
बोरवेल के गड्ढे के समानांतर सुरंग बनाने के कार्य के दौरान संकट कम नहीं था। बचाव टीम के विशेषज्ञों के बताया कि पथरीली चट्टान होने से साँप-बिच्छू मिलने का खतरा भी रहता है, इसलिए तत्काल प्रशासन को एंटी-वेनम और सर्प विशेषज्ञ की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए है । वहीं बारिश के बाद जमीन का जल स्तर बढ़ने के कारण पूरे गांव के लोगों ने बोर चला कर जल स्तर घटाने का प्रयास शुरू किया है । कलेक्टर के निर्देश पर ग्राम पिहरीद में पानी के स्तर को कम करने की प्रक्रिया लगातार जारी है , वहीं बोरवेल में फंसे बच्चे के पास पानी का लेबल कंट्रोल करने के लिए पास के ही 2 स्टापडेम से भी गेट खोलकर पानी को छोड़ा गया है ।
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