Chhattisgarh Assembly Chunav 2023: दो बच्चों की मौत के बावजूद दंपत्ति ने पोलिंग बूथ पर जाकर किया वोट

Chhattisgarh Assembly Chunav 2023: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में जहां लोगों में उत्साह दिखा, वहीं ऐसी तस्वीर भी देखने को मिली, जहां दंपत्ति पर टूटे दु:ख के पहाड़ के बावजूद उन्होंने लोकतंत्र के प्रति अपना दायित्व पूरी ईमानदारी से निभाया।

हम बात कर रहे हैं दंतेवाड़ा जिले के दंपत्ति की, जिन्होंने प्रसव के 3 दिन बाद ही 2 बच्चों को खो दिया। वहीं उनका एक बेटा जगदलपुर के मेडिकल कॉलेज में जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा था, लेकिन उन्होंने लोकतंत्र के प्रति अपना कर्त्तव्य पूरा किया।

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जिन उंगलियों से दंपत्ति ने अपने नवजात बच्चे के सिर को सहलाया था, 3 दिन बाद उसी बच्चे को अपने उन्हीं हाथों से दंपत्ति ने दफना दिया। इस बीच विडंबना ये रही कि फिर अगले दिन उन्हीं उंगलियों से दंपत्ति ने ईवीएम का बटन भी दबाया और उंगली पर अमिट स्याही लग गई। अमिट स्याही अभी ठीक तरह से सूखी भी नहीं थी कि दूसरे बच्चे की भी मौत हो गई और उसे भी दफनाया। एक दंपत्ति पर टूटे दु:खों के इस पहाड़ के बावजूद दंपत्ति ने लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।

मतदान करने युवक अपनी बीमार पत्नी को घर पर और दुधमुँहे बच्चे को अस्पताल में किसी और के भरोसे छोड़ दिया था, ताकि वे देश के प्रति अपना कर्त्तव्य पूरा कर सकें। बताया जाता है कि दंपत्ति ने बीते दिनों जुड़वा बच्चे को जन्म दिया था। इनमें से एक बच्चे की मौत मतदान से ठीक दो दिन पहले हुई। मतदान के बाद जब पिता मेडिकल कॉलेज में भर्ती अपने बीमार बच्चे के पास पहुंचने रवाना हुआ, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और रास्ते में दूसरे बच्चे की मौत की भी खबर मिली।

दरअसल दंतेवाड़ा के रहने वाले भागवत सलामे की पत्नी तुकेश्वरी को प्रसव पीड़ा उठी और 3 नवंबर की रात जिला अस्पताल में भर्ती कराया। 4 नवंबर की तड़के उसने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। उसकी पत्नी सात महीने की गर्भवती थी। जुड़वा बच्चे होने के कारण तुकेश्वरी का प्री-मैच्योर प्रसव हो गया। जन्म के कुछ ही घंटों बाद एक बच्चे ने दम तोड़ दिया।

दूसरे बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे जगदलपुर के मेडिकल कॉलेज रिफर कर दिया। 5 नवंबर को भागवत अपने गंभीर बीमार बच्चे को लेकर जगदलपुर पहुंचा। एक बच्चे की मौत के बाद पत्नी की हालत में थोड़ा सुधार देख 6 नवंबर को उसे छुट्‌टी दे दी। 7 नवंबर को मतदान होना था, जिसके लिए भागवत जगदलपुर से दंतेवाड़ा पहुंच गया और अपनी बीमार पत्नी को लेकर सीधे मतदान केंद्र पहुंचा।

मतदान केंद्र पहुंचकर भागवत ने पत्नी के साथ वोटिंग की और पत्नी को घर पर छोड़कर अपने बीमार बच्चे के पास जगदलपुर के मेडिकल कॉलेज पहुंच ही रहा था कि रास्ते में ही उसे दूसरे बच्चों की मौत की भी खबर मिली। लोगों को इस घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने लोकतंत्र के प्रति कर्त्तव्यों को पूरा करने इस जज्बे को सलाम भी किया है।

इस मामले में छत्तीसगढ़ की मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रीना कंगाले ने इस दंपत्ति के जज्बे को सलाम किया है। उन्होने माना कि ऐसी परिस्थिति में मतदान करने वाले मतदाता उन्होंने पहली बार देखे हैं। कंगाले ने कहा कि आयोग ऐसे मतदाताओं के सम्मान के लिये क्या कर सकता है, उस पर जल्द ही विचार करेंगे।

संवाद सूत्र: ऋषि भटनागर, जगदलपुर/छत्तीसगढ़

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