CG: PPP मॉडल से तैयार हो रहा देश का पहला एथेनॉल प्लांट, भूपेश सरकार की महती परियोजनाओं में है शामिल
छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में अब बहुत जल्द कृषि आधारित एथेनॉल प्लांट की शुरुआत की जाएगी। प्रदेश सरकार की यह महती परियोजनाओं में शामिल यह संयंत्र प्रदेश का पहला एथेनॉल बनाने वाला संयंत्र होगा।
कवर्धा, 05अगस्त। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में अब बहुत जल्द कृषि आधारित एथेनॉल प्लांट की शुरुआत की जाएगी। प्रदेश सरकार की यह महती परियोजनाओं में शामिल यह संयंत्र प्रदेश का पहला एथेनॉल बनाने वाला संयंत्र होगा। कवर्धा जिले के भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने के समीप एथेनॉल प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। शनिवार को इस निर्माण कार्य का निरीक्षण करने कलेक्टर जनमेजय महोबे निर्माण स्थल पर पहुंचे थे।

जनवरी 2024 में निर्माण कार्य होगा पूरा
छत्तीसगढ़ सरकार कवर्धा जिले में प्रदेश के सबसे बड़े और पहले एथेनॉल प्लांट की स्थापना कर रही है। कृषि पर आधारित एथेनॉल प्लांट भूपेश सरकार की प्राथमिक योजनाओं में शामिल है। निरीक्षण करने पहुंचे कलेक्टर को जानकारी देते हुए एथेनाल प्लांट के निर्माता कंपनी NKJ बॉयो फ्यूल के तकनीकी अधिकारियों ने बताया कि आगामी जनवरी माह तक संयंत्र का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

PPP मॉडल पर तैयार होने वाला देश का पहला संयंत्र
भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना के महाप्रबंधक भूपेंद्र ठाकुर ने बताया कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल से स्थापित होने वाला ये देश का पहला एथेनॉल प्लांट है। लगभग 80 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा एथेनॉल प्लांट हाईब्रिड टेक्नोलॉजी से बनाया जा रहा है। जिसमें पेराई के दौरान सीधे गन्ने के जूस से और ऑफ सीजन के दौरान मोलासिस (शीरा) से एथेनॉल बनाया जाएगा। इसके लिए भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना की खाली 35 एकड़ जमीन को चिह्नांकित किया गया था। कलेक्टर ने एथेनॉल प्लांट के निर्माण कार्यों में और तेजी लाने के साथ ही तय समय-सीमा में इसका निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।

प्रतिदिन 40 हजार लीटर एथेनॉल का होगा उत्पादन
इस प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 40 हजार लीटर एथेनॉल प्रतिदिन है, जिसे सीधे बायो फ्यूल के लिए आयल कंपनियों को सप्लाई किया जाएगा। कवर्धा में भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना के पीछे एथेनॉल प्लांट लगाने के लिए मार्च 2020 में ही प्रदेश के मंत्रीमंडल ने इसे मंजूरी दी थी।
धान के लिए अभी इंतजार
राज्य सरकार फिलहाल केंद्र सरकार से धान से एथेनॉल बनाने को लेकर अनुमति का इंतजार कर रही है। सरकार ने धान से एथेनॉल बनाने की योजना भी तैयार कर ली है। लेकिन इसके लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ेगा। जिले में धान के बाद सबसे ज्यादा रकबा गन्ने का है। इस कारण जिले में यह प्रोजेक्ट के सफल होने की संभावना अधिक है। वर्तमान में केवल गन्ने से ही एथेनॉल बनाए जाने को लेकर संयंत्र तैयार किया जा रहा है। अभी किसानों से गन्ना लेकर केवल शक्कर बनाया जाता है। शक्कर को केन्द्र सरकार के एमएसपी के अनुसार बेचा जाता है।
क्षेत्र में बढ़ेंगे रोजगार के साधन
एथेनॉल प्लांट के निर्माण के लिए भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने और छत्तीसगढ़ डिस्टलरी लिमिटेड की सहायक इकाई NKJ BIO Fule Limited के बीच अनुबंध हुआ है। कलेक्टर ने कहा कि एथेनॉल संयंत्र की स्थापना से हर क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। किसानों के लिए भी राहत है। क्योंकि एथेनॉल प्लांट के प्रारंभ होने से किसानों को उनके फसल बेचे जाने के बाद समय पर भुगतान किया जा सकेगा।
बढ़ रहा गन्ने का रकबा
भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना द्वारा हर साल नवंबर के अंतिम हफ्ते से गन्ना खरीदी की जाती है। जिसकी पेराई मार्च तक की जाती है। इस साल कारखाने में करीब 95.5 करोड़ रुपए का गन्ना खरीदा है। भुगतान भी किया जा चुका है। वहीं लगातार इस कारखाना क्षेत्र में रकबा भी बढ़ा है। वर्ष 2020-21 में 10 हजार 548 किसानों ने 6 हजार 642 हेक्टेयर में गन्ने की बुआई की थी। वर्ष 2021-22 में 8 हजार 556 हेक्टेयर गन्ना का रकबा रहा, जिसमें किसानों की संख्या 11 हजार 271 था।
जानिए क्या होता है एथेनॉल
दरअसल एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जिसे वाहन में ईंधन के रुप में इस्तेमाल किया जा सकता है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होता है। एथेनाल के इस्तेमाल से 35 फीसदी कम कार्बन मोनोआक्साइड का उत्सर्जन होता है। इतना ही नहीं यह कार्बन मोनोआक्साइड उत्सर्जन और सल्फर डाइआक्साइड को भी कम करता है।












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