CG Election 2023: भानुप्रतापपुर सीट पर 10 वर्षों से कांग्रेस का कब्जा, भाजपा का सूखा होगा खत्म या मिलेगी हार

Chhattisgarh Assembly Election 2023: बस्तर संभाग की 12 विधानसभा सीटों में से कांकेर जिले की भानुप्रतापपुर की सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। बीते 4 चुनावों में जहां भानुप्रतापपुर से दो बार भाजपा के विधायक रहे हैं, वहीं दो बार कांग्रेस के विधायक भी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

हालांकि पिछले साल क्षेत्र के विधायक रहे मनोज मंडावी की मौत के बाद इस सीट से उनकी पत्नी सावित्री मंडावी ने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा और जीतकर इस सीट को कांग्रेस के खाते में बरकरार रखा। इधर माना जाता है कि क्षेत्र में अब भी मनोज मंडावी की छवि के चलते कांग्रेस अपना वजन बनाए रखने में कामयाब होती दिख रही है।

Chhattisgarh Assembly Election 2023

मालूम हो कि क्षेत्र के विधायक रहे स्व. मनोज मंडावी दबंग नेता माने जाते थे। यही कारण है कि साल 2013 और 2018 में भानुप्रतापपुर की जनता ने उन्हें अपना नेता चुना और विधानसभा भी भेजा।

साल 2018 में हुए चुनाव के बाद बतौर विधायक वे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे। इसी बीच उन्हें विधानसभा उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी दी गई, लेकिन 2022 में हुई उनकी मौत हो गई।

मौत के बाद क्षेत्र में उपचुनाव का ऐलान हुआ और कांग्रेस-भाजपा के बीच कड़ी टक्कर हुई। उपचुनाव में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने वाली मनोज की पत्नी सावित्री को दिवंगत विधायक की सहानुभूति मिली और भाजपा को हराकर वे विधायक बन गईं।

कांग्रेस की सावित्री मंडावी शिक्षित महिला हैं। पूर्व में जहां वे सरकारी स्कूल में शिक्षिका रहीं हैं। ऐसे में शिक्षित होने के साथ ही वे जागरूक भी मानी जाती हैं। इन हालातों में फिलहाल उनका कोई तोड़ नजर नहीं आ रहा है। दूसरी तरफ सावित्री की लोकप्रियता भी क्षेत्र में ठीक वैसी ही मानी जाती है, जैसी उनके पति मनोज की थी।

पिछले चुनावों पर नजर डालें तो साल 2003 में भाजपा के देवलाल दुग्गा ने कांग्रेस के मनोज मंडावी को करीब 1 हजार वोटों से हराया था। इसके बाद दूसरी बार साल 2008 में भाजपा के ब्रह्मानंद नेताम ने फिर से मनोज को करीब 15 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से पछाड़ा। साल 2013 में कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे मनोज मंडावी ने पिछली दो हार का बदला लेते हुए भाजपा के सतीश लाटिया को करीब 14 हजार वोटों से और दूसरी बार 2018 में मनोज ने भाजपा के देवलाल दुग्गा को करीब 26 हजार से ज्यादा मतों से हराकर अपनी विधायकी कायम रखी थी।

इधर मनोज की मौत के बाद 2022 में हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी सावित्री ने भाजपा के ब्रह्मानंद नेताम को करीब 21 हजार वोटों के अंतर से हरा दिया। सावित्री भी क्षेत्र के विकास को लेकर अपने पति के नक्शे-कदम पर काम कर रही हैं। यही कारण है कि उनकी क्षेत्र में खासी लोकप्रियता है।

इधर भाजपा ने सावित्री के विरूद्ध गौतम उइके को उतारा है। गौतम युवा नेता माने जाते हैं। इसके साथ ही क्षेत्र में भी उनकी पकड़ अच्छी मानी जाती है। बावजूद अब तक की स्थिति में कांग्रेस इस सीट पर भाजपा पर भारी पड़ती दिख रही है। इधर आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और इस सीट से चुनाव लड़ रहे कोमल हुपेंडी का भी कोई खास असर नजर नहीं आ रहा है। साल 2018 में जहां कांग्रेस को 72 हजार और भाजपा को 45 हजार से ज्यादा वोट मिले थे, वहीं आप के खाते में 10 वोट भी नहीं पड़े, जबकि हुपेंडी आप से मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे।

इन हालातों में भानुप्रतापपुर सीट से भाजपा व कांग्रेस के बीच सीधी भिड़ंत होने की संभावना है। इसके अलावा तीसरी किसी पार्टी को जनता फिलहाल कंसीडर करने के मूड में नहीं है। बहरहाल इस बार हो रहे चुनाव में कई रोमांचक नतीजे देखने को मिल सकते हैं।

भानुप्रतापपुर की सीट पर भाजपा से गौतम उइके, कांग्रेस से सावित्री मंडावी और आप से कोमल हुपेंडी के अलावा बहुजन समाज पार्टी से जालम सिंह जुर्री, हमर राज पार्टी से अकबर राम कोर्राम, सर्व आदि दल से चंद्रशेखर कोड़प्पा, आजाद जनता पार्टी से निर्मला कोमरे, राष्ट्रीय जनसभा पार्टी से भोजराम मंडावी, फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी से राजेश्वर प्रसाद कांगे, भारतीय शक्ति चेतना पार्टी से लतीफ कुमार पिद्दा और छत्तीसगढ़िया पार्टी से श्यामलाल नरेटी चुनावी मैदान में हैं।

संवाद सूत्र: ऋषि भटनागर, जगदलपुर/छत्तीसगढ़

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