कभी पकड़ते थे बंदूक, अब जमकर खेलेंगे, छत्तीसगढ़ में माओवदियों का हौसला तोड़ेगा बस्तर ओलंपिक
Bastar Olympics: छत्तीसगढ़ सरकार पूर्व नक्सलियों और उनके बच्चों को खेलों के माध्यम से समाज से जोड़ने के लिए बस्तर ओलंपिक की शुरुआत कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा शुरू की गई इस पहल का मकसद आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों, हिंसा से विकलांग हुए लोगों और उनके अनाथ बच्चों को एक खेल आयोजन में एक साथ लाना है। गृह विभाग इस आयोजन का आयोजन कर रहा है, जिसमें खेल और युवा कल्याण विभाग नोडल एजेंसी है।

कमज़ोर होगा माओवादियों का खेमा, नक्सल भर्ती पर लगेगी लगाम
अधिकारियों का मानना है कि बस्तर के युवाओं को शिक्षा और खेलों में शामिल करने से उन्हें नक्सली समूहों में शामिल होने से रोका जा सकता है। ज्ञात हो कि बस्तर ओलंपिक ऐसे समय में हो रहा है, जब नक्सली स्थानीय युवाओं को भर्ती करने या अपनी गतिविधियों में शामिल करने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं। भाकपा माओवादियों ने एक बुकलेट जारी की थी। इसमें उन्होंने निरंतर सुरक्षाबल के अभियानों के कारण कैडरों की भर्ती में आने वाली कठिनाइयों को स्वीकार किया था।
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इस खेल आयोजन के लिए पंजीकरण 1 अक्टूबर से शुरू होगा, यह 20 अक्टूबर तक जिला कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में जारी रहेगा। ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिताएं 1 नवंबर से 10 नवंबर तक सभी 32 ब्लॉकों में आयोजित की जाएंगी। जिला स्तरीय कार्यक्रम 10 नवंबर से 22 नवंबर तक दो-दो दिन तक आयोजित किए जाएंगे।

क्या कहना है गृहमंत्री विजय शर्मा का
राज्य के उप-मुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर ओलंपिक युवा और बच्चों पर फोकस होगा। खासकर,वह लोग जो हिंसा से पीड़ित रहे हैं। शर्मा ने बताया कि इन खेलों से नक्सल हिंसा से पीड़ित लोगों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और उनमें जीवन में आगे बढ़ने की भावना जागृत होगी। उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करने वाले का सरकार सम्मान करेगी। छत्तीसगढ़ सरकार उसे उनकी रुचि का कार्य करने के लिए मदद भी करेगी।

पहले होता था छत्तीसगढ़िया ओलंपिक, जिसे बंद किया गया
ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद छत्तीसगढ़िया ओलंपिक बंद कर दिया था। कांग्रेस के कार्यकाल में आयोजित होने वाले इस खेल के नाम पर करोड़ों के भ्रष्टाचार का मामला भी सामने आया था। राज्य खेल मंत्री टंक राम वर्मा का कहना है कि इस बार छत्तीसगढ़िया ओलंपिक नहीं होगा। खेलो के विकास के केंद्र सरकार ने लिए खेलो इंडिया लाया है। इसी में छत्तीसगढ़ के सभी पारंपरिक खेलों को शामिल किया गया है।

जानिए, कितनी श्रेणियों में होगी खेल प्रतियोगिताएं
बस्तर ओलंपिक में दस अलग-अलग खेल श्रेणियों में प्रतियोगिताएं होंगी। इनमें एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, भारोत्तोलन, कराटे, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और रस्साकशी शामिल हैं। यह आयोजन 1 नवंबर को विकासखंड स्तर पर शुरू होगा और संभाग स्तर पर समाप्त होगा। आत्मसमर्पित नक्सली ओपन श्रेणी में भाग लेंगे जबकि उनके अनाथ बच्चे जूनियर श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करेंगे।

बस्तर हिंसा में विकलांग हो चुके युवा भी बनेंगे हिस्सा
संभाग स्तर पर 25 से 30 नवंबर तक जगदलपुर के प्रियदर्शिनी स्टेडियम परिसर में आत्मसमर्पित नक्सलियों और हिंसा से विकलांग हुए लोगों की टीमें सीधे तौर पर भाग लेंगी। नक्सली हिंसा से विकलांग हुए युवाओं के लिए अलग से टीमें भी शामिल हैं। इसके लिए पुलिस विभाग अलग से पंजीकरण के बिना भागीदारी के लिए समर्पित नक्सली टीमों की सूची उपलब्ध कराएगा। इसमें नक्सल हिंसा में विकलांग हुए नक्सली और उनके अनाथ हुए बच्चों को भी खेलने का अवसर मिलेगा।
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