Balrampur: बीमार मामा को रिक्शे में अस्पताल ले जा रहा था भांजा, सड़कों पर तमाशा देखते रहे लोग

अम्बिकापुर, 03 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में एक बार फिर सिस्टम की बदहाल व्यवस्था का दृश्य सामने आया है। इसे देखकर अब हर कोई यही कह रहा है, कि आखिर कब तक प्रशासन की लापरवाही का शिकार आम नागरिक होता रहेगा। शनिवार को बलरामपुर के वाड्रफनगर में एक बालक अपने बीमार मामा को गंभीर हालत में अस्पताल ले जा रहा था। लेकिन किसी एम्बुलेंस में नहीं बल्कि सब्जी ढोने वाले रिक्शे में, बालक अपने मामा को रिक्शे में लिटाकर पैदल ही रिक्शा खींच रहा था।

कुछ दिनों से खराब थी तबियत, घर में मां ने कराया इलाज

कुछ दिनों से खराब थी तबियत, घर में मां ने कराया इलाज

दरअसल बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर शहर के वार्ड क्रमांक 2 निवासी 40 वर्षीय अशोक पासवान रोजी मजदूरी कर जीवन-यापन करता था। कुछ दिनों से उसका स्वास्थ्य खराब होने के वजह से वह काम पर नही जा रहा था। इस स्थिति में मां व बहन द्वारा उसका इलाज कराया लेकिन कोई सुधार नही हुआ। वहीं अशोक की शादी नहीं हुई है। शनिवार की शाम अशोक की तबियत अचानक ज्यादा बिगड़ने लगी, उसका शरीर ठंडा पड़ने लगा, यह देख घरवाले घबरा गए और उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी करने लगे।

भांजे को नहीं मिला एम्बुलेंस, तो रिक्शे पर ही निकल पड़ा अस्पताल

भांजे को नहीं मिला एम्बुलेंस, तो रिक्शे पर ही निकल पड़ा अस्पताल

लेकिन बीमार मामा और नानी की बेबसी देख भांजे किशन से रहा नहीं गया। उसने एम्बुलेंस को फोन लगाया, लेकिन वब भी उपलब्ध नहीं हुआ। कोई साधन व वाहन नहीं मिलने पर नाबालिग किशन उसे सब्जी ढोने वाले रिक्शे में लेकर अस्पताल के लिए निकल पड़ा। बीमार मामा को उसने रिक्शे पर लिटाकर ऊपर से शॉल से ढक दिया था, और स्वयं रिक्शा खींचते हुए निकल पड़ा। रास्ते में आने-जाने वाले लोग यह देखते हुए निकलते गए लेकिन किसी ने मासूम की मदद नहीं की। यह भावुक करने वाला नजारा देख मुह फेर रहे थे।

पुलिस जवानों की पड़ी नजर, तब 112 से पहुंचाया अस्पताल

पुलिस जवानों की पड़ी नजर, तब 112 से पहुंचाया अस्पताल

रिक्शे में ले जाते हुए अशोक पासवान का शरीर शॉल से ढका था और रिक्शा छोटा होने के कारण पैर रिक्शे से बाहर की ओर लटके हुए थे। यह नजारा देख हर कोई सिस्ट्म को कोस रहा था। लेकिन जैसे ही किशन अपने मामा को रिक्शे में ढोकर वाड्रफनगर चौकी के सामने पहुंचा तो चौकी के पुलिस जवानों की नजर उस नाबालिक बालक और रिक्शे में लेटे हुए व्यक्ति पर पड़ी। चौकी प्रभारी ने उसे रोककर पूछताछ की। जब मासूम ने पूरी बात बताई तो पुलिस ने शरीर को छुकर देखा तो शरीर गर्म था। फिर पुलिसकर्मियों ने उसकी मदद की और उसे अस्पताल पहुंचाया।

अस्पताल में डॉक्टरों ने घोषित कर दिया मृत

अस्पताल में डॉक्टरों ने घोषित कर दिया मृत

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने अशोक की जांच की। लेकिन जांच के पश्चात डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। रविवार को मृतक का पीएम 3 डॉक्टरों की टीम द्वारा किया गया। बीएमओ शशांक गुप्ता ने बताया कि शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में खून की कमी और पेट में अन्न का एक दाना भी नहीं मिलना बताया है। पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति का पता चल पाएगा।

अशोक को पहले भी रिक्शे में पहुंचाया गया था, अस्पताल

अशोक को पहले भी रिक्शे में पहुंचाया गया था, अस्पताल


आज से ठीक दो साल पहले भी अशोक पासवान सड़क पर बेहोश होकर गिर गया था। इस दौरान जब पिता ने 108 को फोन किया तो 108 एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सका था। जिसे अशोक के माता-पिता ने रिक्शा में अस्पताल पहुंचाया था। वहीं अब अशोक पासवान की मौत के बाद अब यह भी पता किया जा रहा है, कि आखिर किस कारण से मासूम भांजा अपने बीमार मामा को रिक्शे में ढोने के लिए विवश हुआ।

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