CG Election 2023: नक्सलियों की बुलेट पर बैलेट होगी भारी, आदिवासी मतदाताओं को लोकतंत्र में भरोसा

Chhattisgarh Assembly Election 2023: विश्वभर में नक्सल वारदातों के कारण सुर्खियां बटोरने वाले बस्तर में इस बार भी नक्सलियों की समानांतर सरकार के खिलाफ लोग लोकतंत्र पर ज्यादा भरोसा करते हैं।

दरअसल पिछले कुछ चुनावों के आंकड़े देखें तो लगातार लोकतंत्र की जीत होने के साथ ही नक्सलियों की दहशत लगातार हारती चली जा रही है। बस्तर संभाग में हर मतदान में लगातार बढ़ रहे मतदान के प्रतिशत से इस बात की पुष्टि होती है।

Chhattisgarh tribal voters trust

बस्तर में ऐसा कोई भी विधानसभा चुनाव नहीं है, जहां नक्सल हिंसा और चुनाव बहिष्कार के ऐलान की कोई घटनाएं न हुई हों। नक्सली चुनाव को प्रभावित करने तरह-तरह से दहशत फैलाने का प्रयास करते हैं।

इसके लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं, लेकिन नक्सलियों की हिंसा से लड़ने स्थानीय आदिवासियों में अब धीरे-धीरे जागरूकता आ रही है और वे नक्सलियों की समानांतर सरकार के बजाय लोकतंत्र को चुन रहे हैं।

नक्सली हिंसा में जहां हत्या, लूटपाट, बम विस्फोट, दहशत बढ़ाने जगह-जगह सड़कें काटना, सड़कों के नीचे आईईडी लगाना, जवानों को नुकसान पहुंचाने बूवी ट्रैप लगाना, पेड़ों पर बैनर-पोस्टर लगाना शामिल है। वहीं चुनाव के दौरान बहिष्कार का ऐलान और मतदान करने की सजा देने की धमकी भी आम हो चुकी है। पिछले चुनावों में नक्सलियों ने इस बात के पोस्टर भी लगाए थे कि वोट डालने पर उंगली काट दी जाएगी।

नक्सलियों की इन धमकियों के बाद प्रशासन ने भी अंदरूनी इलाकों के मतदाताओं को अमिट स्याही लगाने से छूट देने पर विचार भी किया। बताया जाता है कि नक्सली हर बार ये धमकी देते रहे हैं। मतदान के बाद वोटरों की उंगली भी चेक कर उनकी पिटाई भी करते रहे हैं। इसके बावजूद बस्तर के अंदरूनी इलाकों में वोटिंग होती है।

पिछले चुनावों में जंगल में कतार लगाकर वोट डालने के लिए खड़े आदिवासी लोकतंत्र के साथ खड़े देखे जा चुके हैं। यहां नक्सलियों की गनतंत्र पर देश के गणतंत्र की जीत होती रही है। इस बार भी लोकतंत्र की विजय होगी। यही बस्तर में चुनावों की खासियत है। यही कारण है कि बस्तर के चुनावों पर पूरे देश के साथ दुनिया की नजर भी लगी होती है।

इस बार बस्तर में डीआरजी, अजजाएफ, बस्तर फाइटर्स, कोबरा जैसे स्पेशल फोर्स की मदद ली जा रही है। इसके साथ ही सीआरपीएफ और आइटीबीपी के जवान भी बस्तर में मोर्चा संभाले हुए हैं। सीआरपीएफ पहले से मौजूद अपनी बटालियनों के अलावा 100 अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती कर चुका है। वहीं नक्सल विरोधी अभियानों के लिए करीब 30 बटालियनों को भी स्थायी रूप से तैनात किया गया है।

जानिए, पहले चरण में किन 20 सीटों पर होंगे मतदान
अंतागढ़ (अजजा), भानुप्रतापुर (अजजा), कांकेर (अजजा), केशकाल (अजजा), कोंडागांव (अजजा), नारायणपुर (अजजा), बस्तर (अजजा), जगदलपुर (सामान्य), चित्रकोट (अजजा), दंतेवाड़ा (अजजा), बीजापुर (अजजा), कोंटा (अजजा), पंडरिया (सामान्य), कवर्धा (सामान्य), खैरागढ़ (सामान्य), डोंगरगढ़ (एससी), राजनांदगांव (सामान्य), डोंगरगांव (सामान्य), खुज्जी (सामान्य), मोहला-मानपुर (अजजा)

देखिए, विधानसभा चुनाव में बस्तर संभाग में कैसे बढ़ते क्रम पर है मतदान का प्रतिशत
वर्ष मतदान प्रतिशत
1998 49.50
2003 65.66
2008 68.90
2013 72.50
2018 75.00

संवाद सूत्र: ऋषि भटनागर, जगदलपुर/छत्तीसगढ़

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