Chhatarpur: स्कूल में प्रार्थना के दौरान छात्र को कॉर्डियक अरेस्ट, गई जान, डॉक्टर बोले:दुर्लभ घटना
Chhatarpur स्कूली छात्रों और कम में कॉर्डियक अरेस्ट अर्थात गंभीर हृदयघात की बीमारी से लोग भयभीत हैं। सारे देश से जब-तब ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। ताजा मामला मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से सामने आया है। इसमें स्कूल में प्रार्थना के दौरान एक छात्र को गंभीर हृदयघात हुआ और वह मैदान में ही निढाल हो गया। आनन-फानन में उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन जब तक जान जा चुकी थी।

छतरपुर के जाने-माने व्यापारी व समाजसेवी आलोक टिकरिया के 17 साल का बेटा सार्थक टिकरिया सेंट डीसेंट स्कूल में पढ़ रहा था। बीते रोज वह सुबह छह बजे उठकर सामान्य दिनों की तरह स्कूल पहुंचा था। यहां प्रेयर के दौरान लाइन में खड़े-खड़े उसके सीने में एकदम से तेज दर्द होने लगा। दर्द इतना तेज था कि वह अपने पैरों पर खड़ा नहीं रह सकता और जमीन पर गिर गया। तत्काल स्कूल प्रबंधन ने उसे संभाला, परिजन को सूचना दी, निजी कार से अस्पताल लेकर दौड़े, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
सीपीआर दिया, लेकिन बैकअप नहीं मिल सका
जानकारी अनुसार जब सार्थक प्रेयर की लाइन में दर्द से कराहता गिरा तो स्कूल स्टाफ से उसे उठाकर लिटाया, सीपीआर भी दिया, लेकिन कॉर्डियक अरेस्ट इतना तीव्र था कि सीपीआर से भी उसे बैकअप नहीं मिल सका। स्कूल से जब उसे कार में बैठाया गया, उस समय तक वह हल्की-हल्की बात कर रहा था, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले उसकी जान चली गई।
पिता ने लिया साहसपूर्ण निर्णय, नेत्रदान किया
पिता आलोक टिपरिया व उनके परिवार ने 17 साल के बेटे की मौत से पूरा परिवार सदमें में डूबा है, ऐसे गमगीन माहौल में भी पिता और चाचा ने मिलकर बेटे का आईडोनेशन कराने का निर्णय ले लिया, ताकि उनके बेटे की आंखों से किसी को रोशनी मिल सके। वे तो शरीर के अन्य आॅर्गन भी डोनेट करना चाह रहे थे, लेकिन छतरपुर में सुविधा न होने से आर्गन डोनेट नहीं हो सके। सदगुरू नेत्र चिकित्सालय की आॅप्थेलमोलॉजी विभाग की टीम ने उनके घर पहुंचकर कॉर्निया कलेक्ट का प्रिजर्व किया है।
कम उम्र में कॉर्डियक अरेस्ट की दुर्लभ घटना
स्कूली छात्र को महज 17 साल में कॉर्डिटक अरेस्ट जैसी घटना को लेकर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनीष जैन बताते हैं कि इनती कम उम्र में सडन (Sudden) कॉर्डियक अरेस्ट या मायोकार्डियल इंफ़्राक्शन (MI) होना दुर्लभ है। स्कूली बच्चों में कार्डियक अरेस्ट होने की घटनाएं कम ही सामने आती हैं। यह लाइफ स्टाइल, खानपान या जेनेटिकली भी हो सकता है। एमआई में हृदय की मांस पेशियों तक रक्त का प्रवाह अचानक से बंद हो जाता है। हार्ट अटैक और एमआई में काफी अंतर होता है। इसमें मरीज का जीवन बचाने के लिए महज चंद मिनट ही मिल पाते हैं।
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