पार्षद पति की हत्या के आरोप में शिक्षक को आजीवन कैद, सबूतों के अभाव में एमएलए बरी
छतरपुर जिले में चुनावी रंजिश के चलते पार्षद पति की हत्या के आरोप में एक शिक्षक को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। मामले में अपराधियों को शरण देने के मामले में बिजावर विधायक भी सह आरोपी थे।

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चुनावी रंजिश में वार्ड पार्षद के पति की हत्या करने वाले आरोपी शिक्षक को उम्रकैद की सजा हुई है। MP-MLA की स्पेशल कोर्ट ने यह सजा सुनाई है। घटना छतरपुर जिले की है। चुनावी रंजिश में आरोपी प्रमोद दुबे ने कन्हैयालाल की हत्या की थी। इसी मामले में वर्तमान विधायक राजेश शुक्ला को भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन साक्ष्य नहीं मिलने पर कोर्ट ने विधायक शुक्ला को बरी कर दिया। लगभग बाहर साल बाद इस मामले में फैसला आया है।
विशेष लोक अभियोजक अभिषेक मैहरोत्रा ने घटना के बारे में बताया कि 09 जुलाई 2010 को सुबह 6 बजे वार्ड पार्षद सुनियाबाई निवासी एरोरा जिला छतरपुर खेत पर अपने पति कन्हैयालाल के साथ थी, इस दौरान चुनावी रंजिश को लेकर आरोपी प्रमोद दुबे अपने अन्य साथियों के साथ बंदूक एवं कट्टा से लैस होकर आया और उपसरपंच के लिए अपने प्रत्याशी को वोट न देने की बात पर पहले कन्हैयालाल को जातिसूचक गालियां देते हुए कट्टे से तीन फायर किए। जिससे कन्हैयालाल की मौके पर ही मौत हो गई थी। साथ ही आरोपी पूरे परिवार को खत्म करने की धमकी देते हुए फरार हो गए था।
हत्या के साथ एससी/एसटी एक्ट में मामला दर्ज था
घटना के बाद मृतक की पत्नी सुनिया बाई ने इसकी रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई थी। जिस पर बिजावर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 302, 147, 148, 149, 506 बी भादवि और 25/27 आयुध अधिनियम एवं 3 (2) (5) एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच की। इस मामले में वर्तमान बिजावर विधायक राजेश शुक्ला को भी आरोपियों को फरारी के दौरान संरक्षण देने के आरोप में आरोपी बनाया गया था। इस कारण प्रकरण एमपी/एमएलए कोर्ट में विचाराधीन था।
मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास की सजा
इस मामले में सुनवाई करते हुए विशेष न्यायालय (एमपी/एमएलए) सुशील कुमार जोशी अष्टम जिला सत्र ग्वालियर ने प्रमोद दुबे को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा और 10 हजार रुपए के अर्थदण्ड से दंडित किया। बाकी आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। गया।












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