कीमतों में उछाल, पसीने छुड़ा सकती है चाय-कॉफी, तमिलनाडु में क्यों बढ़ाने पड़े दाम, जानिए
पैकेट में बिकने वाली दही की भाषा के विवाद के बाद तमिलनाडु का दही-दूध और डेयरी उद्योग कीमतों में उछाल को लेकर सुर्खियों में है। जानिए कितना दाम बढ़ाया गया

Private Dairies तमिलनाडु में आविन दूध की कमी के बीच दूध-दही की कीमतें बढ़ा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चेन्नई में डीलरों को भेजे सर्कुलर के अनुसार, निजी डेयरी कंपनियों ने दूध के कवर मूल्य 2 रुपये प्रति लीटर और दही पर 8 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए हैं।
इस कारण से बढ़ाई गई कीमतें
निजी डेयरी कंपनियों ने पिछले 15 महीनों में छठी बार कीमत बढ़ाई है। इस साल दूसरी बार दाम बढ़ाए गए। दूध की खरीद कीमतों में वृद्धि और कच्चे माल की लागत (टोन्ड, मानकीकृत और फुल क्रीम दूध उत्पादन में उपयोग) का हवाला देते हुए की गई है।
खुदरा कीमतों पर भी असर
थिरुमाला, जर्सी और श्रीनिवास सहित बाकी निजी डेयरी कंपनियों ने दूध-दही की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया। डेयरी उत्पाद की कीमतों में उछाल के बाद से कॉफी, चाय और अन्य डेयरी खाद्य पदार्थों की खुदरा कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
पड़ोसी राज्यों में दूध की कीमतें
कीमतों में उछाल के फैसले की आलोचना करते हुए तमिलनाडु मिल्क डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन (TMDWA) के एसए पोन्नुसामी ने कहा, तमिलनाडु और पड़ोसी राज्यों में पिछले कुछ महीनों से दूध की खरीद कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
निजी दूध खरीदने पर मजबूर
पोन्नुसामी ने कहा, ऐसी निजी डेयरियां, जो मूल्य विनियमन तंत्र के तहत नहीं आती हैं, ऐसी कंपनियों ने खुदरा कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया है। पिछले तीन हफ्तों के दौरान, चेन्नई में कई उपभोक्ताओं, विशेष रूप से पश्चिमी उपनगरों के लोग निजी दूध खरीदने पर मजबूर हुए हैं।
दूध देर से पहुंचा या अक्सर खराब हो गया
आविन दूध (राज्य के स्वामित्व वाले टीएन कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन का) खुदरा विक्रेताओं तक देर से पहुंचा या अक्सर खराब हो गया। इस कारण भी कीमतें बढ़ी हैं। आविन की अंबात्तुर प्रसंस्करण इकाई में विरोध की खबरें भी आईं।
प्लांट में विरोध की खबरें
दूध-दही की कीमतों में उछाल के संबंध में टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई) की रिपोर्ट के अनुसार, अंबात्तुर में बेहतर खरीद दरों और मशीन की खराबी के कारण विरोध हो रहा था। शोलिंगनल्लुर प्लांट से भी ऐसी ही शिकायतें मिली थीं।
दूध में गांठ और गंध!
मंगलवार को भी स्थानीय निवासियों ने दूध खराब होने की शिकायत की थी। क्रोमपेट के रेजिडेंट-एक्टिविस्ट वी संथानम ने कहा, हममें से कुछ लोगों को दिए गए दूध में गांठ थी और उससे गंध भी आ रही थी।
गांठ का मतलब दूध खराब नहीं
तमिलनाडु सहकारी दुग्ध उत्पादक फेडरेशन लिमिटेड (TNCMPF) के अधिकारियों ने कहा, दूध में इस तरह की गांठ का मतलब यह नहीं है कि दूध खराब हो गया है। उन्होंने तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया।
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बेहतर होमोजेनाइजेशन मानकों की जरूरत
पोन्नुसामी ने कहा, "फेडरेशन इन दिनों निर्माण प्रक्रियाओं में स्किम्ड मिल्क पाउडर और मक्खन का अधिक उपयोग कर रहा है और इसके लिए बेहतर पाश्चुरीकरण और होमोजेनाइजेशन मानकों की जरूरत है। तभी दूध आसानी से चलेगा और बहेगा।"












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