इस कथकली कलाकार की प्रतिभा को उम्र नहीं दे पाई मात
कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी प्रतिभा के आगे उम्र भी मात खा जाती है। ऐसी ही कहानी है 101 वर्षीय नैयर की जिनके लिए उम्र केवल संख्या मात्र है।
चेन्नई। जब वो 15 साल के थे तो उन्होंने कथकली के सीखने के लिए घर छोड़ दिया था। लेकिन केरल के मालाबार क्षेत्र में रहने वाले रुढ़िवादी नैयर परिवार ने इस विचार का समर्थन नहीं किया।
इस साल जून में 101 साल के होने वाले कुन्हीरमन नैयर अपने विख्यात चरित्र कृष्ण के बार में सोचते रहते हैं जिसे उन्होंने कई बार बीते 85 साल से स्टेज पर परफॉर्म किया है।

उन्होंने कहा कि मैं आज के समय में प्रदर्शित किए जाने वाले कथकली से खुश नहीं है। मेरा उससे मनोरंजन नहीं होता।
चुनौतीपूर्ण रहा जीवन
सन् 1916 में 26 जून को जन्में नैयर के लिए उनका जीवन बतौर कथकली कलाकार बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहा।
हालांकि विश्वामित्र,नलन, कीचक और कृष्ण सरीखे अभिनयों ने उन्हें इस दुनिया में अमर कर दिया।
नैयर बताते हैं कि शुरूआत उन्होंने द्रौपदी के अभिनय से किया था। उनके गुरु करुणाकर मेनन न उनसे कहा कि वो कृष्ण करा रोल अदा करें।
उन दिनों गुरू इस बात का निर्णय करते थे कि कौन कैसा रोल अदा करेगा।
ट्रेनिंग रखती है मायने
नैयर के मुताबिक कथकली में ट्रेनिंग बहुत मायने रखती है।
नैयर ने बताया कि किशोरावस्था उन्हें के दौरान दर्द का चेहरे पर एक्सप्रेशन पर लाना था, जो उनसे नहीं हो पा रहा था।
इतने में उनके गुरू ने नाभि में छड़ी भोंक दी और वो छटपटा उठे थे। तब उनके गुरू ने कहा था कि मुझे ऐसा ही एक्सप्रेशन चाहिए।
नैयर को केरल संगीत नाटक अकादमी अवार्ड सहित कई अन्य पुरस्कार मिल चुके हैं। 1945 में उन्होंने भरतनाट्यम का पहला स्कूल कन्नूर में शुरू किया था। उसके बाद उसकी शाखाएं खोली गईं।












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