केंद्र सरकार की ओर से अॅटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने तमिलनाडु के राज्यपाल को शक्ति परीक्षण की सलाह दी
अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने तमिलनाडु के राज्यपाल सी विद्यासागर राव को सलाह दी है कि एक सप्ताह के भीतर ही वो विधानसभा में बहुमत परीक्षण करवाएं जिससे पता चल सके कि आखिर बहुमत किसके पास है।
चेन्नई। तमिलनाडु की सत्ता में काबिज होने के लिए एआईएडीएमके की महासचिव वीके शशिकला और तमिलनाडु के कार्यवाहक मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम के बीच बढ़ते मतभेद को देखते हुए केंद्र सरकार की सलाह पर भारत सरकार के अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने तमिलनाडु के राज्यपाल सी विद्यासागर राव को सलाह दी है कि एक सप्ताह के भीतर ही वो विधानसभा में बहुमत परीक्षण करवाएं जिससे पता चल सके कि आखिर बहुमत किसके पास है।

मुकुल रोहतगी ने राज्यपाल को एक सप्ताह के भीतर ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के साथ ही बहुमत सिद्ध करने के लिए पार्टियों को आमंत्रित करें। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अपने सुझाव में कहा कि वर्ष 1998 में यूपी विधानसभा में जगदंबिका पाल और कल्याण सिंह के बीच सदन में फ्लोर टेस्ट हुआ था। इस फ्लोर टेस्ट में कल्याण सिंह 29 वोटों से जीत गए थे।
वहीं डीएमके के नेता एमके स्टालिन ने कहा है कि हम पहले दिन से ही इस बात पर जोर दे रहे हैं कि जिसके पास बहुमत हो, उसे सरकार बनाने के लिए बुलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम किसी का समर्थन नहीं कर रहे हैं। एआईएडीएमके हमारा विरोधी दल है और वो हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा कि जयललिता के आय से अधिक वाले मामले पर कोर्ट से फैसला आने के बाद ही कोई टिप्पणी करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को ऐसा निर्णय लेना चाहिए जिससे राज्य में जल्द से जल्द कोई सरकार स्थापित हो सके।












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