Sanjeev Juneja: कौन हैं संजीव जुनेजा? जिनके घर जाकर JP नड्डा ने की मुलाकात, 'ब्रांड मशीन' के नाम से हैं शुमार
Sanjeev Juneja: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को 9 वर्ष पूरे हो गए। ऐसे में बीजेपी नेता अपनी सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के काम में जुटी हुई है। इसी कड़ी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चंडीगढ़ दौरे के दौरान उद्यमी डॉ. संजीव जुनेजा से उनके घर पर जाकर मुलाकात की।
दरअसल, 'संपर्क से समर्थन' अभियान के तहत भारत भर में 1000 प्रसिद्ध शख्सियत से मिलने का एक महाअभियान चलाया जा रहा है। जिसके तहत बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने डॉ. संजीव जुनेजा से मुलाकात कर मोदी सरकार के 9 वर्षों के सफल कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों पर चर्चा की।

इस दौरान संजीव जुनेता ने ट्वीट कर बताया, "संपर्क से समर्थन कैंपेन के तहत जेपी नड्डा से मेरे आवास पर मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। नड्डा ने भारतीय जनता पार्टी के 9 वर्षों के सफल कार्यकाल के दौरान किए गए देश एवं राज्यों के विकास कार्यों, जीएसटी रॉल मॉडल के साथ-साथ और भी अन्य विषयों पर चर्चा की।"
डॉ. संजीव जुनेजा आंत्रप्रेन्योर होने के साथ-साथ समाजसेवी भी हैं। उन्होंने अपनी मुलाकात के दौरान भाजपा अध्यक्ष को भी स्टार्टअप को लेकर कई अहम सुझाव दिए। जेपी नड्डा करीब एक घंटे तक उनके घर रुके और पारिवारिक सदस्यों से मुलाकात की।
जानिए कौन हैं संजीव जुनेजा?
आपको बता दें कि भारत के प्रसिद्ध व्यापार उद्यमी और निवेशक जुनेजा को 'ब्रांड मशीन' के रूप में जाना जाता है। उन्होंने भारत में कई बड़े घरेलू आयुर्वेदिक ब्रांड की स्थापना की है। उनके लॉन्च किए गए आयुर्वेदिक उत्पाद देश के हर घर में लोगों की जरूरत बन गए हैं। उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर एसबीएस ग्रुप ऑफ कंपनीज को बुलंदियों तक पहुंचाया है।
आन्त्रप्रेन्योर और इन्वेस्टर के अलावा संजीव जुनेजा मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं, जिन्होंने IIM अहमदाबाद, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, टाई, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट जैसी बड़ी संस्थानों में व्याख्यान दिए हैं। इसी के साथ आयुर्वेद के आधुनिक रूप को देश में पहचान दिलाने में भी उनका अहम योगदान है। डॉ. संजीव जुनेजा ने "वोकल फॉर लोकल" और "आत्मनिर्भर भारत" जैसे कैंपने का भी समर्थन भी किया है।
2 हजार रुपए में शुरू किया खुद का बिजनेस
बता दें कि संजीव जुनेजा के माता-पिता हरियाणा के अंबाला में आयुर्वेदिक डॉक्टर थे। यही वजह है कि उनको आयुर्वेदिक दवाओं की जानकारी थी। 1999 में पिता के निधन के बाद घर की सारी जिम्मेदारी उन पर आ गई, जिसके बाद उन्होंने दवाओं का कारोबार शुरू करने के लिए अपनी मां से दो हजार रुपए की मदद ली। फिर लगातार मेहनत और रिसर्च के बाद साल 2003 में खुद की कंपनी शुरू की। जिसके बाद आजतक पीछे मुड़कर नहीं देखा।












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