राजनाथ, बादल के दखल के बाद सिद्धू ने रद्द किया अनशन

क्रिकेट से राजनीति में आए सिद्धू ने शनिवार की सुबह मुख्यमंत्री बादल द्वारा फैक्स भेजकर अमृतसर के विकास से संबंधित मुद्दे पर गौर करने का आश्वासन देने के बाद बिल्कुल अंतिम समय में अनशन रद्द कर दिया। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि राजनाथ सिंह ने भी सिद्धू द्वारा अनशन की घोषणा के बाद उनसे बात की थी और अनशन करने से मना किया था।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सिद्धू की अनशन की घोषणा को दुर्भाग्यपूर्ण और अनुचित बताया था। करीब आठ महीने तक अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर रहने के बाद इस महीने की शुरुआत में अमृतसर लौटे सिद्धू ने बादल सरकार की सिखों के पवित्र नगर अमृतसर के विकास के लिए पर्याप्त कदम न उठाने को लेकर आलोचना की थी। प्रदेश की अकाली दल-भाजपा की गठबंधन सरकार पर सिद्धू द्वारा किए गए हमले ने मुख्यमंत्री को खासा नाराज कर दिया था।
यहां तक कि बादल ने सिद्धू से मिलने तक से मना कर दिया था, तब राजनाथ सिंह ने इस विवाद को सुलझाने की पहल की थी। पंजाब में मार्च 2007 से अकाली दल और भाजपा की गठबंधन सरकार सत्ता में है। अमृतसर में सिखों के पवित्र धार्मिक स्थल 'हरमंदर साहिब' का मंदिर है, जिसे गोल्डन टेंपल के नाम से भी जाना जाता है। सिद्धू के अमरण अनशन की घोषणा के बाद पंजाब सरकार ने कहा कि अमृतसर में हमेशा से ही विभिन्न विकास परियोजनाएं तत्काल प्रभाव से लागू और क्रियान्वित की जाती रही हैं।"
सरकार ने कहा कि अमृतसर में स्थानीय निकायों के स्तर पर या राज्य सरकार ने अपने स्तर पर शहर के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी है। जो भी देर हुई है, उसके पीछे न्यायालय का हस्तक्षेप और भारत सरकार की अनुमति जैसी वजहें हैं, जो राज्य सरकार के नियंत्रण में नहीं है।












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