पंजाब में निकोटीन पर बैन, नहीं बजेगा हुक्का बार-बार-बार
चंडीगढ़। ऐसा लग रहा है कि पंजाब खुद पर लगे "नशेड़ी राज्य" के टैग को हटाना चाहता है। जी हां निकोटी पर लगे प्रतिबंध को इसी की शुरुआत माना जा रहा है। पंजाब निकोटीन पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला राज्य बन गया है। यानी अब यहां हुक्का बार तो होंगे, लेकिन हुक्के में निकोटीन नहीं होगी। और बिना निकोटीन जब नशा नहीं चढ़ेगा तो जाहर है, हुक्का बार-बार-बार... गीत भी नहीं बजेगा।

पंजाब में निकोटी पर प्रतिबंध लगाने की शुरुआत चंडीगढ़ से की गई है। चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को लिखित रूप से इस बारे में अवगत करा दिया है।
असल में करीब दो साल पहले सरकार ने हुक्का बार पर प्रतिबंध लगाने की कवायद शुरू की, जोकि बेहद कठिन था और उससे हजारों लोगों का रोजगार खतरे में पड़ सकता था। लिहाजा हाईकोर्ट के सुझाव पर सरकार ने हुक्के की जगह उसमें डाली जाने वाली निकोटीन पर प्रतिबंध लगा दिया।
निकोटीन को विष की श्रेणी में रखा गया है और सरकार ने निकोटिन पर यह अधिसूचना विष अधिनियम, 1991 और विष (रखना और बिक्री) नियम, 2015 के तहत जारी की है।
गौरतलब है कि 'बर्निग ब्रेन सोसाइटी' ने हाईकोर्ठ में निकोटीन की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की थी। हाई कोर्ट के निर्देश पर सरकार ने टीमों का गठन किया है, जो निकोटीन की बिक्री रोकने का काम करेगी। जो कोई भी निकोटीन बेचते पकड़ा गया, उसे गिरफ्तार कर सीधे जेल भेज दिया जायेगा।












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