मोदी सरकार ने लॉन्च किया SAMEER ऐप, जानिए क्या है, कैसे देगा प्रदूषित क्षेत्रों की जानकारी?
नई दिल्ली। केंद्र सरकार प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में आज केंद्र सरकार ने नया ऐप पेश किया है। सरकार ने आज प्रदूषण की जानकारी देने वाला नया ऐप पेश किया है, जो लोगों को प्रदूषण के बारे में जानकारी देगा। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javadekar) ने लोगों से SAMEER App डाउनलोड करने की अपील की।

कैसे करें डाउनलोड
समीर ऐप डाउनलोड करने की अपील करते हुए प्रकाश जावेड़कर ने कहा कि यह ऐप लोगों को उन इलाकों की जानकारी देगा, जहां प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने इस समीर ऐप के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि समीर ऐप लोगों को देश भर के विभिन्न शहरों में प्रदूषित क्षेत्रों की पूरी जानकारी देगा। जिन इलाकों में भारी प्रदूषण हैं, उन जगहों को लाल निशान के साथ ऐप में दर्शाया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वो गूगल प्ले स्टोर में जाकर इस SAMEER ऐप को डाउन लोग करें ,जो उन्हें प्रदूषित इलाकों की जानकारी देता रहे।

कैसे करेगा काम
इस SAMEER App को केंद्रीय पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड(Central Pollution Control Bureau) ने तैयार किया है, जो एयर क्लाविटी की जानकारी लोगों को देगा। 100 से ज्यादा शहरों में प्रदूषण के स्तर और हवा के क्वालिटी की जानकारी इस ऐप के जरिए मिलेगी। इतना ही नहीं इस ऐप की मदद से लोगों को अपनी शिकायत दर्ज करवाने में भी मदद मिलेगी। इस ऐप के जरिए लोग कूड़ा निस्तारण, सड़कों पर धूल, गाड़ियों व अन्य चीजों से होने वाले प्रदूषण की शिकायत केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड से कर सकते हैं और उसे ट्रैक भी कर सकते हैं।

प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता
प्रदूषण को कम करने के लिए उन्होंने लोगों को ई वाहनों के इस्तेमाल का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि देश में 2 से अधिक ई-वाहनों का इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने कहा कि मैं खुद भी ई-वाहन का ही इस्तेमाल करता हूं और लोगों से भी अपील करता हूं कि वो इसका ही इस्तेमाल करें, ताकि प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सके। सर्दी की शुरुआत होते ही एयर क्वालिटी इंडेक्स खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि अगले दो सालों में 60 से 70 बिजली संयंत्रों को चिह्नित कर बंद किया जाएगा। उन्होंने बताया कि देश में प्रदूषण फैलाने के प्रमुख कारण ट्रैफिक, इंडस्ट्री, कूड़ा-कचरा, धूल, पराली और जियोग्राफी है। उन्होंने कहा कि लोग सार्जनिक वाहनों का इस्तेमाल करें। कम दूरियों के लिए गाड़ियों के इस्तेमाल से बचें।












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