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Mutual Fund सच में सही है, जानिए क्यों है यह निवेश का बेहतरीन विकल्प, बिना डरे कर सकते हैं Invest

Mutual Fund: आपने अक्सर टीवी वो विज्ञापन जरूर देखा हो, जिसमे तमाम सेलेब्स कहते हैं कि म्युचुअल फंड सही है। इस विज्ञापन में सचिन तेंदुलकर, रोहित शर्मा, महेंद्र सिंह धोनी जैसे सितारों को आप देख चुके हैं।

ऐसे में आपके मन में भी यह सवाल जरूर उठता होगा कि आखिर ये म्युचुअल फंड है क्या। क्या इसमे निवेश करना सही होता, क्या इसमे निवेश करना जोखिम भरा होता है। ऐसे ही तमाम सवाल जो म्युचुअल फंड से जुड़े हैं उसका जवाब हम इस लेख के जरिए देने की कोशिश करेंगे।

Mutual Fund

शेयर बाजार से डरते हैं तो म्युचुअल फंड सही है

दरअसल शेयर बाजार को लेकर लोगों के मन में काफी डर होता है। तमाम फिल्मों में शेयर बाजार को जुएं की तरह दिखाया जाता है, जहां लोग रातोंरात अमीर बन जाते हैं तो कंगाल भी बन जाते हैं। फिल्मों ने जिस तरह से शेयर बाजार को बदनाम किया हुआ है, उसकी वजह से म्युचुअल फंड को लेकर भी लोगों में डर बना रहता है।

बुरे से बुरी स्थिति में भी एफडी से अच्छा रिटर्न

म्युचुअल फंड की बात करें तो बाजार में सैकड़ों स्कीम होती हैं, इसमे से आप सबसे खराब स्कीम भी चुन लेते हैं और तकरीबन 7-8 वर्ष आप इसमे अपना निवेश बनाए रखते हैं तो आश्वस्त रहिए कि आपको एफडी से तो ज्यादा ही रिटर्न मिलेगा, लिहाजा आपका नुकसान होना लगभग नामुमकिन है।

अच्छा म्युचुअल फंड देता है 22-23 फीसदी तक रिटर्न

वहीं अगर आपने अच्छा म्युचुअल फंड स्कीम चुना तो आपका रिटर्न 22-23 फीसदी तक हो सकता है जोकि किसी भी निवेश से कहीं बेहतर है। आपका निवेश सुरक्षित रहता है। अब जब म्युचुअल फंड में आपका भरोसा बनने लगा है तो आइए जानते हैं कि आखिर म्युचुअल फंड क्या होता है।

क्या है म्युचुअल फंड
म्युचुअल फंड से आप सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं बल्कि गोल्ड, रियल स्टेट, डेट फंड आदि में भी आप निवेश कर सकते हैं। म्युचुअल फंड में जब भी जोखिम की बात होती है तो वह ज्यादातर इक्विटी यानि शेयर बाजार के जोखिम को ध्यान में रखते हुए होती है।

निवेश करने के मुख्य रूप से तीन तरीके होते हैं। पहला यह कि आप खुद से शेयर को चुनें और उसमे निवेश करें, लेकिन इसमे जोखिम यह होता है कि आपको खुद से इन शेयर की रिसर्च करनी होती है, इसके लिए काफी जानकारी की जरूरत होती है।

दूसरा तरीका होता है कि आप किसी एक्सपर्ट के कहने पर शेयर में निवेश करें, लेकिन इसमे आपको ही शेयर को खरीदना और बेचना होता है, एक्सपर्ट आपको सिर्फ राय देता है।

तीसरा तरीका होता है म्युचुअल फंड। इसके जरिए आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं। इसे आपको लगातार ट्रैक करने की जरूरत नहीं है। इसमे फीस भी काफी कम होती है। इसके लिए आपको बहुत अधिक ज्ञान की जरूरत नहीं होती, सिर्फ आपको अच्छा फंड चुनना होता है।

कैसे काम करता है म्युचुअल फंड
मान लेते हैं आपके पास 10 हजार रुपए हैं और आपको किसी एक्सपर्ट ने कहा कि आप एमआरएफ का शेयर ले लीजिए। लेकिन एमआरएफ का एक शेयर ही एक लाख से अधिक का है। ऐसे में आपके पास 10 हजार रुपए हैं लिहाजा आप कैसे उस शेयर को खरीद सकते हैं।

ऐसी परिस्थिति में म्युचुअल फंड अलग-अलग लोगों से एक-एक लाख रुपए लेगा। ऐसे 10 लोगों से पैसे लेने के बाद वह आसानी से आप लोगों के लिए एमआरएफ के शेयर को खरीद लेगा।

यानि आप एमआरएफ के शेयर को अकेले नहीं खरीद सकते हैं लेकिन 10 लोगों ने मिलकर आसानी से एमआरएफ के शेयर को खरीद लिया। जिसके बाद एमआरएफ की एक-एक यूनिट को म्युचुअल फंड सभी में बांट देगा और इतने के ही हिस्सेदार आप कंपनी में बन जाते हैं।

कैसे करता है काम

म्युचुअल फंड मुख्य रूप से फंड मैनेजमेंट कंपनी बनाती है। वह अलग-अलग तरह की कंपनियों में निवेश करते हैं, उनकी कंपनी में अलग-अलग एक्सपर्ट होते हैं और आपको भरोसा दिलाते हैं कि आपका पैसा सही कंपनियों में निवेश किया जाएगा। यह फंड मैनेजमेंट कंपनी लोगों को अच्छे रिटर्न का भरोसा देती है।

जब लोग इस फंड मैनेजमेंट कंपनी में पैसा निवेश करते हैं तो कंपनी अलग-अलग शेयर में आपका पैसा निवेश करती है और इसकी एक यूनिट आपको मिल जाती है। जिसे आप जब चाहे बेच सकते हैं और इसका पैसा दो दिन में आपके बैंक खाते में आ जाएगा।

म्युचुअल फंड के फायदे
आपका थोड़ा पैसा कई कंपनियों में लग जाता है। आप 10 हजार भी म्युचुअल फंड में लगाना चाहते हैं तो आसानी से लगा सकते हैं। एक एक्सपर्ट आपके पैसे को मैनेज करता है।

लेकिन जब आप 10 हजार लेकर किसी एक्सपर्ट के पास जाएंगे तो वह आपका पैसा नहीं निवेश करेगा क्योंकि आपके पास बहुत कम पैसे हैं। लिहाजा म्युचुअल फंड से आप आसानी से एक्सपर्ट के जरिए बड़ी कंपनियों में निवेश करते हैं। आपके निवेश के बाद म्युचुअल

म्युचुअल फंड के नुकसान
ऐसा कई बार होता है कि म्युचुअल फंड कंपनियों अधिक से अधिक लोगों को अपने साथ लाने का काम करती हैं, वह फंड को बेहतर तरह से मैनेज करने की बजाए अधिक निवेशकों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करती हैं ताकि उनका मुनाफा बढ़े।

म्युचुअल फंड मैनेजर के हाथ में नहीं होता है कि वह कब पैसा निवेश करे और कब निकाले। मान लेते हैं का आप अपना पैसा बीच में निकालना चाहते हैं को म्युचुअल फंड मैनेजर को शेयर बेचकर आपका पैसा देना पड़ता है। ऐसे में हो सकता है कि कंपनी घाटे में हो तो भी म्युचुअल फंड मैनेजर को आपका शेयर बेचना पड़ता है।

सबकुछ फंड मैनेजर और रिसर्च टीम पर निर्भर करता है। लिहाजा वह बड़ा जोखिम नहीं लेते हैं क्योंकि उनपर अपनी साख बचाने के साथ आपका पैसा बचाने का जिम्मा होता है। ऐसे में कुछ कंपनियां जो बड़ा रिटर्न दे सकती हैं, बावजूद इसके ये फंड मैनेजर उसमे निवेश नहीं करते हैं क्योंकि वह किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते हैं।

म्युचुअल फंड का इस्तेमाल
इसका इस्तेमाल आपको अपने आने वाली जरूरतों के लिए करना चाहिए। आपको अपनी 5 साल बाद स्कूल की फीस, 10 साल बाद कॉलेज की फीस, 15 साल बाद बिजनेस आदि के लिए पैसों की जरूरत के लिहाज से निवेश करना चाहिए।

मान लेते हैं आपको अपने बच्चे के लिए 10 साल बाद 15 लाख की जरूरत है तो आप उस हिसाब से हर महीने उतने पैसे की एसआईपी शुरू कर दीजिए। ऐसे ही शादी, रिटायरमेंट आदि के लिए आप निवेश शुरू कर सकते हैं। यानि म्युचुअल फंड में किसी भी वर्ग के व्यक्ति निवेश कर सकते हैं। आप अपनी जरूरत और आय के हिसाब से इसमे निवेश कर सकते हैं।

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