Foreign Exchange Reserves: भारत के लिए अच्छी खबर! लगातार दूसरे सप्ताह बढ़ा विदेशी मुद्रा भंडार
Foreign Exchange Reserves के मोर्चे पर भारत के लिए अच्छी खबर है। रिजर्व बैंक ने कहा है कि लगातार दूसरे हफ्ते देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है। भारत के भंडार में अब 586 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक राशि है।

Foreign Exchange Reserves में इजाफा हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने की खबर है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1.657 अरब डॉलर बढ़कर 586.412 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दूसरे सप्ताह वृद्धि हुई है। पिछले सप्ताह कुल भंडार 6.306 अरब डॉलर बढ़कर 584.755 अरब डॉलर हो गया था। विदेशी मुद्रा भंडार में रखे यूरो, पाउंड, येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की वैल्यू भी देखी गई है।
शुक्रवार शाम को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साप्ताहिक सांख्यिकीय पूरक (weekly statistical supplement) जारी किया। इसके अनुसार, देश का स्वर्ण भंडार 52.1 करोड़ डॉलर घटकर 46.125 अरब डॉलर रह गया।
RBI के अनुसार, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 3.8 करोड़ डॉलर घटकर 18.412 अरब डॉलर रह गया। समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) के साथ देश की आरक्षित स्थिति 1.2 करोड़ डॉलर बढ़कर 5.19 अरब डॉलर हो गई।
विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत हुआ। आंशिक रूप से परिवर्तनीय रुपया पिछले कारोबारी सत्र के दौरान 82.1750 के करीब की तुलना में 82.0950 पर था।
अलग-अलग मुद्राओं के भंडार के आधार पर ग्रीनबैक के मूल्य को ट्रैक करने के लिए यूएस डॉलर इंडेक्स (डीएक्सवाई) का इस्तेमाल किया जाता है। इसके आधार पर मुद्रा भंडार 0.03 प्रतिशत बढ़कर 101.88 हो गया।
आरबीआई ने अपने मासिक बुलेटिन में कहा, वैश्विक आर्थिक स्थितियां अत्यधिक अनिश्चितता से घिरी हुई हैं। वित्तीय स्थितियां अस्थिर बनी हुई हैं। वित्तीय बाजारों पर दुनियाभर की नजरें हैं।

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RBI के इस बयान में कहा गया है कि देश में, कुल मांग की स्थिति लचीली बनी हुई है। इसे संपर्क-गहन सेवाओं (contact-intensive service) की वापसी से समर्थन मिला है। बंपर रबी फसल की उम्मीदें हैं।
रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, बुनियादी ढांचे पर राजकोषीय जोर, और चुनिंदा क्षेत्रों में कॉर्पोरेट निवेश में पुनरुद्धार अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत हैं। हेडलाइन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक-(सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति धीरे-धीरे अप्रैल 2022 में अपने चरम पर थी।
अप्रैल, 2022 के 7.8 प्रतिशत से घटकर मार्च 2023 में CPI आधारित मुद्रास्फीति 5.7 प्रतिशत हो गई है। 2023-24 की चौथी तिमाही में इसके 5.2 प्रतिशत तक और कम होने का अनुमान है।












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