Warren Buffett का पैसा बनाने का फॉर्मूला, जानिए किस सिद्धांत ने उन्हें बनाया इतना अमीर

Warren Buffett: शेयर बाजार में आपने कई लोगों को पैसा कमाते और गंवाते सुना होगा। बाजार में निवेश करके मोटा पैसा कमाना हर किसी के बस की बात नहीं है। बाजार में निवेश के जरिए पैसा कमाने के लिए आपको बाजार की समझ के साथ खुद पर संयम रखना होता है और यह हर किसी से नहीं हो पाता है।

लेकिन दुनिया के सबसे बड़े निवेशकर वॉरेन बफेट के पास यह दोनों हुनर था। इन दोनों हुनर की वजह से ही वॉरेन बफेट दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की लिस्ट में शामिल हो गए।

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35 की उम्र में मिलेनियर बनने का संकल्प
वारेन बफेट जब बहुत छोटे थे तो उन्होंने कहा था कि या तो मैं 35 साल की उम्र तक मिलेनियर बन जाउंगा नहीं तो किसी ऊंची बिल्डिंग से छलांग लगा दूंगा। 20 अगस्त को 1930 को अमेरिका ओमाहा में जन्मे वारेन बफेट के पिता एक स्टॉक ब्रोकर थे।

आर्थिक संकट में था परिवार
वह एक राजनेता भी थे। 1930 में अमेरिकी संकट की वजह से परिवार पर बड़ा आर्थिक संकट आया। दरअसल जिस बैंक में परिवार ने अपनी पूरी सेविंग जमा की थी वह बैंक बंद हो गया। परिवार में आर्थिक संकट को वारेन ने करीब से देखा था, इसी वजह से उन्होंने कहा था कि 35 साल की उम्र में मैं मिलेनियर बनूंगा।

चीजों को बारीकी से देखते थे
वॉरेन जब छोटे थे तो वह कोल्ड ड्रिंक की मशीनों में पड़े ढक्कन को देखते थे और यह जोड़ते थे कि लोग कौन सी कोल्डड्रिंग सबसे अधिक पीते हैं। ढक्कनों को गिनने के बाद उन्हें पता चला कि लोग कोका कोला सबसे अधिक पीते हैं। यही वजह है जब वह बड़े हुए तो उन्होंने कोका कोला के शेयर में बड़ा निवेश किया था।

बचपन से बिजनेस का शौक
वॉरेन बफेट गणित में काफी अच्छे थे, वह नंबर को काफी अच्छे से समझते थे। बचपन में ही वॉरेन बफेट ने कोका कोला, च्विंगम, मैग्जीन, अखबार तक बेचा था। उन्हें बचपन से पैसा कमाने में अच्छा लगता था।

बेंजामिन ग्राहम से सीखा निवेश का हुनर
जब वॉरेन का हारवर्ड में दाखिला नहीं हुआ तो वह काफी निराश हुए थे, जिसके बाद वह कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ना शुरू किया यहां उन्होंने बेंजामिन ग्राहम से निवेश के दो बड़े सिद्धांत सीखे। पहले सिद्धांत था, कभी भी अपने निवेश के पैसे को खोना मत, दूसरा नियम था, पहले नियम को कभी मत भूलना।

क्या था शुरुआती फॉर्मूला
वॉरेन कंपनी में निवेश निवेश उसकी वैल्यू के आधार पर करते थे। वह मौजूदा दाम की बजाए उसकी असल कीमत के आधार पर खरीदते थे। मान लीजिए कोई पेन 10 रुपए का है और वह 20 में बिक रहा है तो वह उसे नहीं खरीदते थे बल्कि जब यह पेन 5 रुपए में मिलता था तो वह इसे खरीदते थे और जब इसका दाम 10 को हो तो वह उसे वापस बेच देते थे। वॉरेन ने इस सिद्धांत को बाजार में इस्तेमाल किया और काफी पैसा बनाया।

बदली रणनीति
वॉरेन बफेट ने ऐसी कंपनी को तलाशते थे जिसकी वैल्यू तो अच्छी हो लेकिन खराब मैनेजमेंट के चलते वह सस्ते में मिल रही हो। चार्ल्स मंगर जोकि उनके निवेश के पार्टरन थे, उनसे मिलने के बाद वॉरेन ने अपनी रणनीति में बदलाव किया।

इन कंपनियों से बनाया पैसा
वॉरेन ने ऐसी कंपनी में निवेश करना शुरू किया जो काफी अच्छी हो और उसे बाद में बेचने की जरूरत ना पड़े क्योंकि उस कंपनी की वैल्यू खुद बढ़ेगी और कंपाउंडिंग से उन्हें कमाई होगी। इसी सिद्धांत को लगाते हुए वॉरेन ने जिलेट, कोका कोला के कई शेयर खरीदे।

बर्कशायर हाथवे के चेयरमैन
बर्कशायर हाथवे में भी उन्होंने काफी शेयर खरीदे थे। इस कंपनी में काफी अधिक हिस्सेदारी की वजह से वह इसके चेयरमैन बन गए, जिसके बाद उन्होंने कंपनी के बैड असेट को बेचना शुरू कर दिया और इस कंपनी को टेक्सटाइल के बिजनेस से बदलकर निवेश कंपनी के तौर पर बदल दिया। वॉरेन ने कंपाउंडिंग के नियम को जीवनभर अपनाया और खूब पैसा बनाया।

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