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RBI के पूर्व गर्वनर राजन की चेतावनी, अगले छह महीने में गंभीर हो सकती है NPA की समस्या

RBIके पूर्व गर्वनर राजन की चेतावनी, अगले छह महीने छह माह में गंभीर हो सकती है NPA की समस्या

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन ने मंगलवार को कहा कि हमारे देश का फाइसेंस सेक्‍टर गहरी मुसीबत में हैं। उन्‍होंने चेतावनी दी कि अगले छह महीने में बैंकों के फंसे कर्ज यानी एनपीए में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि समस्या को जितनी जल्दी पहचान लिया जाए उतना अच्‍छा होगा।

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दिल्ली स्थित आर्थिक थिंक टैंक एनसीएईआर द्वारा आयोजित एक वेबिनार को संबोधित करते हुए राजन ने कहा कि महामारी से प्रेरित मंदी सामान्य मंदी से अलग है। कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए देशव्‍यापी लॉकडाउन का लगभग सभी कंपनियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और उनमें से कई कंपनियां लोन की किस्‍तें लौटाने में कठिनाइयों का सामना कर रही हैं।राजन ने ये भी कहा कि अगर हम वाकई में एनपीए के वास्तविक स्तर को पहचाने तो अगले छह महीने में गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) का स्तर काफी अप्रत्याशित होने जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि हम समस्‍या में हैं हम जितनी जल्‍दी इसे स्‍वीकार करें उतना अधिक बेहरत है क्योंकि हमें वाकई में इस समस्या से निपटने की जरूरत है।

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वित्तीय क्षेत्र में महामारी के बाद ऋण में भारी वृद्धि हुई। ऐसे परिदृश्य में, क्रेडिट रेटिंग पर ध्यान केंद्रित करना उचित नहीं है। फोकस खर्च पर नहीं बल्कि मंदी से कैसे बाहर आना चाहिए इस पर होना चाहिए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की राय के पिछले बयान पर टिप्‍पणी करते हुए राजन ने कहा कि वित्त मंत्री का बयान पूरी तरह से निराशाजनक" है क्योंकि यह वर्तमान चुनौतियों का समाधान नहीं करता है। उन्‍होंने फिर दोहराया कि एनपीए का स्तर में अब से छह महीने अभूतपूर्व वृद्धि होगी। हम मुसीबत में हैं।

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मंगलवार को मीडिया में प्रकाशित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में आर्थिक सुधारों पर एक लेख का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें जनधन खातों की सफलता की बात कही गयी है लेकिन कुछ अर्थशास्त्रियों की राय इससे अलग हैं। राजन ने कहा, ''हमें अभी भी लक्षित लोगों को लाभ अंतरण करने में कठिनाई हो रही है। लोग अभी भी सार्वभौमिकरण की बात कर रहे हैं क्योंकि हम लक्ष्य नहीं कर सकते। जनधन उस रूप से काम नहीं किया जैसा कि इसका प्रचार-प्रसार किया गया।
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राजन ने सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में किए सुधारों की तरीफ की। उन्‍होंने कहा कि निश्चित रूप से सरकार ने सुधारों को आगे बढ़ाया है। उसके सही तरीके से क्रियान्वयन होने से अर्थव्यवस्था को लाभ होगा। गोल्डमैन सैक्स के प्रमुख भारत की अर्थशास्त्री प्राची मिश्रा ने वेबिनार में अपनी प्रस्तुति में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2015 में जीडीपी 4.4% के अनुबंध पर आ जाएगी और देश के मध्यम अवधि के विकास दृष्टिकोण के आसपास अनिश्चितता बहुत अधिक बनी हुई है।

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