Success Story:लक्ष्मी मित्तल कैसे बने स्टील इंडस्ट्री के किंग? Vivek Bindra ने बताई संघर्ष से सफलता की कहानी
Lakshmi Mittal Success Story: लक्ष्मी मित्तल एक भारतीय उद्योगपति होने के साथ-साथ वर्ल्ड के सबसे बड़े स्टील उत्पादक कंपनी के मालिक भी हैं। हालांकि यहां तक का उनका सफर चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में भारत के बिजनेस टाइकून लक्ष्मी मित्तल की स्टोरी मोटिवेशनल स्पीकर और बिजनेस कोच डॉ. विवेक बिंद्रा ने हाल ही साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि लक्ष्मी नारायण मित्तल कैसे स्टील इंडस्ट्री के बादशाह बन गए।
डॉ. विवेक बिंद्रा ने मित्तल के संघर्ष से लेकर सफलता के शिखर तक पहुंचने तक के सफर के साथ कुछ खास बिजनेस स्ट्रेटेजीज के बारे में भी बात की। बुर्ज खलीफा से लेकर वर्ल्ड ट्रेड सेंटर तक इन्हीं की Arcelormittal कंपनी का स्टील लगा हुआ है। जो कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्टील कंपनी है।

2005 में मित्तल दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति भी थे, लेकिन सफलता के लिए उनका रास्ता कई चुनौतियों से भरा था।
साधारण आगाज से ग्लोबल सक्सेस
लक्ष्मी नारायण मित्तल का जन्म राजस्थान के एक छोटे से गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। घर में कई बच्चे होने के कारण उनका पालन-पोषण बहुत साधारण था। अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए उनके पिता परिवार को कोलकाता ले गए, जहां वे नौ लोगों के साथ एक छोटे से कमरे में रहते थे। हिंदी माध्यम के स्कूल में पढ़ने के बावजूद, मित्तल ने 12वीं कक्षा की परीक्षा में अव्वल स्थान हासिल किया।
कमजोर इंग्लिश को बनाया हथियार
बारहवीं में टॉप आने के चलते उनका कोलकाता के लगभग सभी कॉलेजेस में एडमिशन हो गया था, लेकिन कमजोर अंग्रेजी के कारण सेंट जेवियर्स कॉलेज में इनका एडमिशन नहीं हो सका। जिसके दृढ़ निश्चयी होकर, उन्होंने अपनी जेब खर्च से एक अंग्रेजी अखबार खरीदा और रोजाना नए शब्द सीखे और फिर वाक्य बनाते। इसके बाद सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्रिंसिपल से जाकर बात करते। उनकी इस लगन को देखकर प्रिंसिपल ने उन्होंने कॉलेज में एडमिशन दे दिया।
पिता की स्टील मिल को किया ज्वाइन
इसके बाद उन्होंने ग्रेजुएशन में कोलकाता यूनिवर्सिटी से टॉप किया।दरअसल, तीन साल बाद जब कॉलेज का रिजल्ट आया तो इन्होंने कॉमर्स में कोलकाता यूनिवर्सिटी से टॉप किया। जिसके बाद वही प्रिंसिपल खुद उनके घर आए और सिर्फ 19 साल की उम्र में उन्हें कॉलेज का असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का ऑफर दिया। लेकिन तब प्रोफेसर बनने से मना करते हुए पिता की स्टील मिल को ज्वाइन कर लिया। तब से लेकर आज तक उन्होंने कभी पलट कर पीछे नहीं देखा और आज देश के सबसे बड़े और सफल बिजनेसमैंस की लिस्ट में शामिल हैं।
ऐसे खड़ा और बड़ा किया अपना बिजनेस
लक्ष्मी मित्तल की सबसे बड़ी बिजनेस स्ट्रेटेजी रही है कि वो बर्बाद होती हुई चीजों को संभाल कर आबाद करना जानते हैं। उन्होंने दुनिया भर की ऐसी स्टील कंपनीज को खरीदा जो कि खत्म होने की कगार पर थी, जिन्हें देश की सरकारें तक चला पाने में सक्षम नहीं थी। उन कंपनीज को सस्ते दामों पर खरीदा और अपनी एक्सपर्टीज का इस्तेमाल करके उन्हें मुनाफे की कंपनी में बदल दिया।
उनकी अच्छी बात ये थी कभी भी किसी भी एक्वायर की गई कंपनी के एंप्लॉय को निकाला नहीं बल्कि उनकी एक्सपर्टीज का इस्तेमाल कंपनी को बेहतर बनाने के लिए किया। मित्तल की कहानी इस बात का सबूत है कि कैसे दृढ़ संकल्प और रणनीतिक सोच से सपनों को वास्तविकता में बदला जा सकता है, भले ही शुरुआत बहुत साधारण रही हो और रास्ते में कई बाधाएं आई हों।












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