Petrol Diesel Prices: US-Iran के बीच MOU साइन, क्रूड ऑयल धड़ाम, भारत में घटे या बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम?
Petrol Diesel Prices : अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते (MOU) के बाद वैश्विक तेल बाजार में राहत देखने को मिल रही है। गुरुवार, 18 जून को शुरुआती ट्रेडिंग सेशन में तेल की कीमतों में गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड फ़्यूचर्स 89 सेंट या 1.12% गिरकर $78.66 प्रति बैरल पर आ गए, जबकि U.S. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 98 सेंट या 1.28% गिरकर $75.81 प्रति बैरल पर आ गया है।
क्या भारत में सस्ता हुआ पेट्रोल-डीजल?
फिलहाल इसका जवाब है'नहीं', 18 जून 2026 को सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद घरेलू खुदरा कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

मालूम हो कि US-Iran तनाव और होर्मुज संकट के दौरान मार्च से मई 2026 के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था। कई मौकों पर ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया था लेकिन भारतीय तेल कंपनियों ने 25 मई के बाद दाम में कोई बदलाव नहीं किया।
पेट्रोल का रेट (प्रति लीटर)
- नई दिल्ली-102.12
- मुंबई-111.21
- कोलकाता-113.51
- चेन्नई-107.77
- नोएडा-102.12
- लखनऊ- 101.89
- बेंगलुरु- 98.81
डीजल रेट (प्रति लीटर)
- नई दिल्ली-95.20
- मुंबई-99.55
- कोलकाता-99.82
- चेन्नई-99.55
- नोएडा-97.56
- लखनऊ- 95.36
- बेंगलुरु- 98.81

क्या बोले एक्सपर्ट?
मार्केट एक्सपर्ट गौरव सान्याल ने जी बिजनेस से कहा कि 'अगर ब्रेंट कुछ हफ्तों तक 75-80 डॉलर के दायरे में बना रहता है और रुपये पर दबाव नहीं बढ़ता, तब तेल कंपनियां राहत देने पर विचार कर सकती हैं।'
डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा ?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेस्ट एशिया में युद्ध खत्म करने के लिए ईरान के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद कहा कि 'इस पर साइन हो गया है। मैंने वर्साय में इस पर साइन किया। बस अभी-अभी साइन किया है।' इस डील के मुताबिक Strait of Hormuz को फिर से खोला जाएगा, इस रास्ते के बंद होने से दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें बहुत बढ़ गई थीं।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज?
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। पश्चिम एशिया से आने वाला काफी तेल Strait of Hormuzके रास्ते ही पहुंचता है। इस मार्ग में व्यवधान आने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात बिल पर सीधा असर पड़ता है। यही वजह है कि US-Iran समझौते को भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।














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