US Apples: अमेरिकी सेब पर एडिशनल ड्यूटी खत्म, भारतीय उत्पादकों पर नहीं होगा असर, केंद्र ने क्या कहा? जानिए
अमेरिकी सेब और अखरोट के आयात पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क को हटा दिया है। केंद्र ने इसके साथ ये भी सुनिश्चित किया है कि इसका असर भारतीय उत्पादकों पर ना पड़े।
केंद्र सरकार ने सेब और अखरोट के बढ़ते दामों पर नियंत्रण के लिए बडा कदम उठाया है। सरकार अमेरिकी सेब और अखरोट के आयात पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क को 20 प्रतिशत घटाने का निर्णय है। ऐसे में आशंक व्यक्त की जा रही है कि अमेरिकी सेब के दाम घटने का स्थानीय सेब उत्पादकों पर असर होगा। लेकिन केंद्र ने कहा है कि वाणिज्य मंत्रालय के आश्वस्त करते हुए कहा कि इसका असर भारतीय सेब उत्पादकों पर नहीं होगा।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को अमेरिका से आयात किए जाने वाले सेब और अखरोट को लेकर बड़ा निर्णय लिया। मंत्रालय की ओर जारी एक बयान में कहा गया है कि अमेरिकी सेब और अखरोट पर 50% और 100% का एमएफएन शुल्क लागू रहेगा। केवल अतिरिक्त 20% शुल्क हटा दिया गया है। मंत्रालय आगे कहा कि अमेरिकी बादामों पर एमएफएन दर 100 रुपये प्रति किलोग्राम लागू रहेगी। केवल 20 रुपये प्रति किलोग्राम की अतिरिक्त एमएफएन दर हटाई गई है।

इस साल जून में विश्व व्यापार संगठन में अमेरिका और भारत छह लंबित विवादों को समाप्त करने पर सहमत हुए थे, जिसमें चना, दाल, बादाम, अखरोट, सेब, बोरिक एसिड और डायग्नोस्टिक अभिकर्मकों सहित कुछ अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करने का निर्णय शामिल है। जी 20 के बाद अब सेब पर अतिरिक्त ड्यूटी घटाई गई है।
वहीं केंद्र के इस निर्णय की जम्मू कश्मीर में विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने केंद्र सरकार की आलोचना की है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा, "अमेरिका को खुश करने के लिए, वे न केवल जम्मू-कश्मीर में बल्कि हिमाचल और उत्तराखंड में भी स्थानीय उत्पादकों को ख़त्म करना चाहते हैं. मैं भारत सरकार से अपील करता हूं कि वह ऐसा कोई कदम न उठाए, जिससे यहां पहले से मौजूद गरीबी और बढ़ जाएं और हम एक और संकट में फंस जाएं. हमें आयातित सेब, बादाम या अखरोट नहीं चाहिए. ऐसा लगता है कि यह जी20 देशों को खुश करने का फैसला है."
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने केंद्र के इस कदम की आलोचना की। मुफ्ती ने कहा कि देश में सेब की कोई कमी नहीं है। हिमाचल और यहां (जम्मू-कश्मीर) बड़ी मात्रा में अच्छी गुणवत्ता वाले सेब होते हैं। लेकिन केंद्र अब भी सेब का आयात क्यों करना चाहता है, जो कि 'मेक इन इंडिया' एक मजाक बनाता है।












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