1 अप्रैल से नहीं होगा सैलरी और काम के घंटों में बदलाव, सरकार ने नए लेबर कोड को कुछ समय के लिए टाला
नई दिल्ली। केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने नए वित्त वर्ष माह यानी 1 अप्रैल से लागू होने जा रहे नया लेबर और वेज कोड को फिलहाल के लिए टाल दिया है। इसका मतलब यह हुआ कि प्राइवेट सेक्टर और कार्यालयों में पहले जैसी ही व्यवस्था अमल में लाई जाएगी। लेबर कोड को टालने का कारण पांच राज्यों में चल रहे चुनाव जैसे कई कारण, ट्रेड यूनियनों का विरोध और राज्यों द्वारा नियम बनाने में देरी को बताया जा रहा है। बता दें कि नए लेबर और वेज कोड को लेकर कार्मचारियों को यह चिंता थी कि उनके काम करने के घंटों में बदलाव होगा, इसके साथ ही टेक होम सैलरी पर भी असर पड़ेगा। हालांकि अभी सरकार ने लोगों को ऐसी चिंताओं से राहत दी है।

श्रम मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा कि नया लेबर और वेज कोड को लागू करने मे देरी होने की उम्मीद थी लेकिन इसके टाले जाने को लेकर कोई विशेष कारण नहीं बताया गया। हालांकि, सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के सूत्रों ने पुष्टि की है कि पांच राज्यों मे विधानसभा चुनाव लेबर कोड के लागू होने में देरी का कारण है। बीजेपी नेता ने कहा, केवल अधिसूचना लंबित थी, इसमें देरी के लिए चल रहे चुनाव जैसे राजनीतिक कारण हैं। ट्रेड यूनियनों ने भी नियमों का विरोध करते हुए कहा है कि वे श्रमिकों के हितों के खिलाफ हैं।
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार चाहती है कि राज्य सरकारें पहले चार लेबर कोड के संबंध में अधिसूचना जारी करें, ताकि किसी तरह के कानूनी अड़चन का सामना ना करना पड़े। उधर, न्यू लेबर कोड को लागू करने में आ रही अड़चनों से इंडिया इंक ने राहत की सांस ली है। इसके टलने की वजह से कंपनियों को सैलरी पुनर्निधारण के संबंध में मंथन के लिए और समय मिल सकेगा। नया लेबर और वेज कोड को लेकर कुछ कंपनियों का कहना है कि अगर बेसिक सैलरी सीटीसी के आधे के बराबर होगी तो उनका खर्च बढ़ जाएगा और कारोबार करना मुश्किल होगा।
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