RBI गवर्नर ने कहा- उभरते बाजारों में मौद्रिक अर्थशास्त्र पर फिर से गौर करने की जरूरत
नई दिल्ली। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि उभरते बाजारों में मौद्रिक अर्थशास्त्र पर नये सिरे से सोचने की जरूरत है। उनका कहना है कि वैश्विक कर्ज संकट ने पारम्परिक और गैर-पारंपरिक मौद्रिक नीतियों की कमी को उजागर कर दिया है जिसके कारण खासकर उभरते विकासशील देशों के संदर्भ में इस पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। दास ने वाशिगंटन में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्वबैंक की वार्षिक ग्रीष्मकालीन बैठक से इतर एक व्याख्यान में कहा कि इसमें आधुनिक केंद्रीय बैंकों की नीतिगत दर (रेपो) 0.25 प्रतिशत घटाने या बढ़ाने को लेकर परंपरागत सोच में भी बदलावा की जरूरत है।

गवर्नर ने कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 में भारत की आर्थिक विकास दर 7.2 फीसदी रहने की उम्मीद है और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से जोखिम के ऊपर रहने के बावजूद महंगाई लक्ष्य से कम देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के असर के महंगाई पर दबाव को कम अतिशयोक्ति कहा जा सकता है। उन्होंने कहा, हमारी प्राथमिकता सभी आंकड़ों पर निगरानी बनाए रखना और विकास दर में तेजी लाने और अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बरकरार रखने के लिए समन्वित रूप से कदम उठाना है।'
आपको बता दें कि आरबीआई ने पिछले हफ्ते चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर अनुमान को पहले के 7.4 फीसदी से घटाकर 7.2 फीसदी कर दिया। इसने आगामी महीनों में हेडलाइन महंगाई कम रहने का अनुमान जताया है, जिससे दरों में कटौती की और गुंजाइश बनती है।












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