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Credit Suisse: सिलिकॉन वैली के बाद अब इस स्विस बैंक पर खतरा! रघुराम राजन बैंक डूबने पर क्या बोले?

अमेरिका के सिलिकॉन वैली बैंक के बाद स्विटजरलैंड के बैंक पर खतरा मंडराने की बातें सामने आई हैं। रघुराम राजन समेत कई एक्सपर्ट इस पर चिंता जता चुके हैं। शेयर बाजार के संकेतक भी अलार्मिंग हैं। जानिए इन खबरों के मायने

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अमेरिकी अर्थव्यवस्था के साथ-साथ पूरे यूरोप की इकोनॉमी गहरे संकट में फंस सकती है। अमेरिका की सिलिकॉन वैली बैंक के डूबने के बाद दुनिया के एक और बड़े बैंक पर दिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा है। स्विटजरलैंड के क्रेडिट सुइस पर खतरा मंडरा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक आर्थिक मामलों की समझ रखने वाले और कई बैंकों के बारे में सटीक पूर्वानुमान लगा चुके शख्स ने क्रेडिट सुइस के डूबने की आशंका जताई है। इस रिपोर्ट के बाद हड़कंप मचा हुआ है। जानिए आशंका के हकीकत बनने पर क्या असर होगा

राजन बोले- निवेश की सख्त जरूरत

दुनिया के मशहूर अर्थशास्त्री में गिने जाने वाले भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ने भी Credit Suisse पर बयान दिया है। उन्होंने कहा,"क्रेडिट सुइस की समस्या यह है कि इसका कोई दूसरा बिजनेस नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में, क्रेडिट सुइस लगभग हर उस घोटाले में शामिल रहा है जो प्रकाश में आए हैं। क्रेडिट सुइस में सुधार हो रहा है, लेकिन इसमें निवेश की सख्त जरूरत है।"

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क्रेडिट सुइस बड़े झटके झेल चुका है

राजन ने घोटालों की कड़ी का जिक्र करते हुए CNBC-TV18 के साथ एक इंटरव्यू में कहा, 2021 में अमेरिकी निवेश फर्म आर्किगोस के पतन के साथ-साथ दिवालिया ब्रिटिश फाइनेंसर ग्रीन्सिल से जुड़े अरबों की सप्लाई चेन और वित्त निधियां फ्रीज होने से क्रेडिट सुइस को कड़ी चोट लगी थी। बता दें कि राजन वर्तमान में अमेरिका के शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं।

बैंक की इमेज को धक्का, निवेशकों ने पैसे निकाले

स्विट्जरलैंड में एक आपराधिक गिरोह के लिए मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों के कारण बैंक की इमेज को बड़ा नुकसान हुआ था। स्विट्जरलैंड के दूसरे सबसे बड़े बैंक Credit Suisse ने चौथी तिमाही में 110 अरब स्विस फ़्रैंक (120 अरब डॉलर) से अधिक पैसे निकाले गए थे।

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166 साल पुराने स्विस बैंक के पास कितनी पूंजी

नवभारतटाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, क्रेडिट सुइस के पास लगभग 580 अरब डॉलर की संपत्ति है। अमेरिका के दिवालिया सिलिकन वैली बैंक के मुकाबले 166 साल पुराने स्विस बैंक- क्रेडिट सुइस की पूंजी लगभग दोगुनी है। अमेरिकी शेयर मार्केट और वॉल स्ट्रीट की वित्तीय गतिविधियों पर करीबी नजर रखने वाले विशेषज्ञ रॉबर्ट कियोसाकी ने कहा कि वह क्रेडिट सुइस के बारे में "चिंतित" हैं। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में सिलिकॉन वैली बैंक और सिग्नेचर बैंक के डूबने के बाद रॉबर्ट कियोसाकी ने दावा किया है कि क्रेडिट सुइस के डूबने का खतरा है।

15 साल पहले बैंक डूबने का अनुमान सही

कियोसाकी ने फॉक्स न्यूज को बताया, "समस्या बॉन्ड बाजार है।" बता दें कि इन्होंने करीब 15 साल पहले 2008 में लेहमैन ब्रदर्स के डूबने की सफल भविष्यवाणी की थी। कियोसाकी ने कहा, "मैंने वर्षों पहले लेहमन ब्रदर्स को फोन किया था, और मुझे लगता है कि अगला डूबने वाला बैंक क्रेडिट सुइस है।"

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    डॉलर को डूबने से बचाने की कोशिश

    रिच डैड कंपनी के सह-संस्थापक रॉबर्ट कियोसाकी ने बताया कि बॉन्ड बाजार अमेरिका को "गंभीर संकट" में डाल देगा। अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने की आशंका है। उन्होंने कहा, "अमेरिकी डॉलर दुनिया में अपना वर्चस्व खो रहा है। इसलिए फेड इसे अधिक से अधिक प्रिंट करने जा रहा है। डॉलर को डूबने से बचाने की कोशिश हो रही है।

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    Credit Suisse ने खुद मानी कमजोरी!

    कियोसाकी ने कहा कि बॉन्ड मार्केट क्रैश और उनकी पीढ़ी की सेवानिवृत्ति के कारण वह क्रेडिट सुइस के बारे में "चिंतित" हैं। दुनिया के आठवां सबसे बड़े निवेश बैंक पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अस्थिर शेयर बाजार के दौरान उन्होंने चांदी और सोने में निवेश या खरीदारी करने की सलाह भी दी। खास बात ये कि कियोसाकी ने जब बैंक डूबने का खतरा जाहिर किया तो इसके कुछ ही समय बाद क्रेडिट सुइस ने 2021 और 2022 की अपनी रिपोर्टिंग में "भौतिक कमजोरी" (material weakness) स्वीकार कर ली। रिपोर्ट के अनुसार, क्रेडिट सुइस एक प्रभावी जोखिम मूल्यांकन प्रक्रिया को डिजाइन करने और बनाए रखने में विफल रहा। इसका मकसद बैंक के वित्तीय विवरणों में महत्वपूर्ण गलत बयानों के जोखिम की पहचान और विश्लेषण है।

    दो साल में 80 फीसद मार्केट वैल्यू घटा

    क्रेडिट सुइस ने हाल के वर्षों में कई समस्याओं का सामना किया है। इसमें
    मार्च 2021 में ब्रिटेन की फर्म ग्रीन्सिल के दिवालिया होने के बाद अपना लगभग 80 प्रतिशत मार्केट वैल्यू खोना प्रमुख है। अब जबकि अमेरिका के दो बैंकों के डूबने पर दुनिया भर के वित्तीय बाजार प्रभावित हुए। एशिया में शेयर बाजार डूबे। यूरोप में लड़खड़ाए। ऐसे में दुनिया के आठवें सबसे बड़े बैंक पर डूबने का खतरा इकोनॉमी के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता।

    दिग्गजों के इस्तीफे से डूबने की आशंका गहराई

    संकट का आभास इसलिए भी क्योंकि क्रेडिट सुइस की शीर्ष पदाधिकारी नीलकंठ मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार नीलकंठ अब एक्सिस बैंक से जुड़ेंगे। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार भारत में क्रेडिट सुइस के प्रतिभूति अनुसंधान के प्रमुख रहे नीलकंठ मिश्रा एशिया प्रशांत रणनीति के सह-प्रमुख भी थे। मिश्रा के पास लगभग ढाई दशक का अनुभव है। क्रेडिट सुइस से पहले उन्होंने इंफोसिस टेक्नोलॉजीज के साथ भी वरिष्ठ तकनीकी स्तर पर काम किया था। मिश्रा भारत के प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद का भी हिस्सा रहे हैं। इनके पास आईआईटी, कानपुर से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री है। जी बिजनेस की रिपोर्ट के अनुसार मिश्रा से पहले कई वरिष्ठ बैंकर स्विट्जरलैंड के क्रेडिट सुइस का साथ छोड़ चुके हैं। एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, क्रेडिट सुइस में भारतीय इक्विटी अनुसंधान के पूर्व प्रमुख आशीष गुप्ता ने करीब 14 साल बाद नवंबर, 2022 में क्रेडिट सुइस से इस्तीफा दिया।

    रघुराम राजन यूरोपीय बैंकों पर क्या बोले

    भले ही क्रेडिट सुइस निगेटिव ग्रोथ के कारण चुनौतियों का सामना कर रहा है, रघुराम राजन यूरोपीय बैंकिंग प्रणाली के बारे में आशावादी दृष्टिकोण भी रखते हैं। उन्होंने कहा, अन्य यूरोपीय बैंकों को क्रेडिट सुइस जैसी समस्या नहीं है। घर की कीमतें स्थिर हो सकती हैं, लेकिन आपूर्ति कम होने के कारण, लोग बिक्री नहीं कर रहे हैं। अगर बाजार में और 10% की गिरावट आती है, तो भी फेडरल रिजर्व बहुत परेशान नहीं होगा।

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    क्रेडिट सुइस के शेयरों में 20% से अधिक गिरावट

    रिपोर्ट्स के अनुसार, क्रेडिट सुइस के शेयरों में 20% से अधिक की गिरावट के कारण यूरोपीय बैंकिंग सूचकांक में 6% से अधिक की गिरावट आई। स्विस बैंक को पांच साल के क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप (सीडीएस) पर नया झटका लगा। इससे निवेशकों की बढ़ती चिंताएं भी उजागर हुईं।

    अमेरिका में चिंता के दो कारण हैं

    रघुराम राजन के अनुसार, फेड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं दिखती है। 25 बीपीएस की बढ़ोतरी अभी भी एक मजबूत संभावना की तरह दिखती है क्योंकि अमेरिका में मुख्य मुद्रास्फीति उच्च स्तर पर बनी हुई है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि अमेरिका में, कम से कम इस समय ऐसा प्रतीत होता है कि फेड ने सभी शेयरों को बाहर कर दिया है। जमाकर्ताओं को गारंटी दी गई है। अमेरिका में चिंता के दो कारण हैं। एक यह है कि बहुत से छोटे और मध्यम बैंक अपने बॉन्ड पोर्टफोलियो पर अचेतन घाटा झेल रहे हैं। उन्होंने कहा, कई बैंक लंबी अवधि के बॉन्ड रखते हैं, जो फेड की दर में बढ़ोतरी के साथ मूल्य में गिर गए हैं।

    जमाकर्ता बहुत चिंतित

    अमेरिका की दूसरी चुनौती के बारे में राजन ने कहा, कई बैंकों के पास ऐसे जमाकर्ता हैं जिन्होंने इंश्योरेंस का ऑप्शन नहीं लिया है। इन दो परिसंपत्ति मूल्यों के विषाक्त संयोजन में गिरावट आई है। ऐसे में इंश्योरेंस न कराने वाले जमाकर्ता बहुत चिंतित हो रहे हैं। सिलिकॉन वैली बैंक की विफलता का कारण क्या है? अब जो प्रयास किया जा रहा है वह दोनों पक्षों को आश्वस्त करने का है, एक तरफ आप अपनी संपत्ति के पूर्ण मूल्य के खिलाफ उधार ले सकते हैं।

    अमेरिका में कोर मुद्रास्फीति अभी भी मजबूत

    बकौल राजन, "सीपीआई रिपोर्ट जो कल सामने आई, वह सहज नहीं है। अमेरिका में कोर मुद्रास्फीति अभी भी सामान्य से अधिक है, मुद्रास्फीति में कमी आई है, लेकिन आपूर्ति श्रृंखला में सुधार जैसे विकल्प आसान थे। अभी भी इन्फ्लेशन को 2-2.5 प्रतिशत तक नीचे लाना होगा। इसलिए मुझे लगता है कि अगर फेड देखता है कि वित्तीय क्षेत्र स्थिर हो जाता है, तो लोन की दरों में 25 आधार अंक की वृद्धि कर सकता है।

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