अडानी ग्रुप को लेकर हिंडनबर्ग रिसर्च-सेबी आमने सामने, SEBI के नोटिस पर दिया तीखा जवाब

जिस तरह से पिछले वर्ष अडानी ग्रुप को लेकर अमेरिका की शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट दी थी, उसके बाद अडानी ग्रुप के शेयर को काफी झटका लगा था। लेकिन अब सेबी की ओर से हिंडनबर्ग रिसर्च को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

बता दें कि हिंडनबर्ग रिसर्च ने आरोप लगाया था कि अडानी ग्रुप ने गलत तरीकों का इस्तेमाल करके अपने कर्जों को कम दिखाया। हिंडनबर्ग ने सेबी की नोटिस पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत में ताकतवर लोग जो भ्रष्टाचार में लिप्त हैं उन लोगों का खुलासा करन वालों को डराने की कोशिश है।

Hindenburg Research

हिंडनबर्ग रिसर्च ने कहा कि तकरीबन 1.5 साल की जांच के बाद सेबी को हमारी अडानी ग्रुप के खिलाफ जांच में कोई भी अनियमितता नहीं मिली। लेकिन इसके बावजूद सेबी ने हमारे द्वारा स्कैंडल शब्द के चुनाव पर सवाल खड़ा किया। अडानी ग्रुप के साथ सेबी भ्रष्ट कामों में बराबरी से हिस्सेदार है और ऐसे समूहों के साथ मिलकर काम करती है।

हिंडनबर्ग रिसर्च ने कहा कि सेबी ने हमारे ऊपर अस्पष्ट आरोप लगाए हैं, सेबी ने कहा है कि हमने अपनी रिपोर्ट में गलत शब्दों का इस्तेमाल करके पाठकों को गुमराह करने की कोशिश की। हमारा मानना है कि सेबी ने अपनी जिम्मेदारी को नजरअंदाज किया है, जो फर्जीवाड़े में शामिल हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की बजाए जांच करने वालों को ही कटघरे में खड़ा कर रही है।

सेबी ने हमपर अपने अधिकार क्षेत्र का दावा करके खुद को ही फंसा लिया है। जो नोटिस हमें भेजा गया है उसमे उस पार्टी का नाम नहीं लिया गया है जिसको लेकर हमारी रिसर्च थी और जिसका वास्तव में भारत से संबंध है।

कोटक बैंक की बात करें तो यह भारत के सबसे बड़े बैंक के साथ ब्रोकरेज फर्म है। इसकी स्थापना उदय कोटक ने की थी। उसी ने हमारी जांच में अहम भूमिका निभाई है। सेबी ने इस बैंक का नाम नहीं लिया, नोटिस में कोटक की बजाए KMIL शब्द का इस्तेमाल किया गया है।

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