SEBI ने बदले नियम, आईपीओ राशि के इस्तेमाल से जुड़े नियमों को किया सख्त
नई दिल्ली, 28 दिसंबर: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (आईपीओ) से जुड़े कई नियमों में बदलाव किया है। आईपीओ राशि से संबंधित नियमों को सख्त बना दिया गया है। अब आईपीओ के प्राइस बैंड में कम से कम 5 फीसदी का अंतर रखना जरूरी होगा। साथ ही बड़े निवेशकों के लिए ऑफर फॉर सेल के जरिए एग्जिट के नियमों को भी बदला गया है। सेबी बोर्ड की मंगलवार को हुई बैठक में ये बड़े फैसले लिए गए है।

सेबी के निदेशक मंडल की बैठक में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई), वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ), म्युचुअल फंड और समाधान प्रक्रिया से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। सेबी ने अपने बयान में कहा है कि आईपीओ से प्राप्त राशि के इस्तेमाल से जुड़े नियमों को कड़ा करने के अलावा एंकर निवेशकों के लिए लॉक-इन अवधि बढ़ाकर 90 दिन कर दी गई है। सेबी ने इकाइयों की ओर से अंतिम समाधान आवेदन दाखिल करने की समयसीमा को 60 दिन कर दिया है।
एक अप्रैल से लागू होंगे नए नियम
सेबी चेयरमैन अजय त्यागी ने बोर्ड की बैठक में लिए फैसले को बेहद अहम बताया है। उन्होंने इन फैसलों को लेकर कहा कि नए नियमों से बड़े निवेशकों के लिए ओफीएस के जरिए एक्जिट पर सख्ती होगी। छोटे एचएनआई के लिए नॉन इंस्टीट्यूशन इन्वेस्टर्स का कोटा 33 फीसदी रिजर्व हो जाएगा। सेबी ने प्रिफरेंशियल इश्यू से जुड़े नियमों में भी बदलाव को मंजूरी दे दी है। ये नए नियम 1 अप्रैल 2022 से लागू हो जाएंगे।












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