SBI ने ग्राहकों को किया अलर्ट! दान देने से पहले कर लें चेक,वरना खाली हो सकता है बैंक अकाउंट

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपने खाताधारकों को सतर्क किया है। बैंक ने खाताधारकों को दान देने से पहले अलर्ट रहने की सलाह दी है। बैंक ने कहा है कि दूसरों को आर्थिक मदद पहुंचाना कहीं आपको महंगा न पड़ जाए। SBI ने अपने ग्राहकों के लिए अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि बाढ़ राहत में मदद देने से पहले कुछ सावधानी को बरतें वरना आप धोखाधड़ी के शिकार हो सकते हैं। बैंक ने लोगों को सलाह दी है कि बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए फंड ट्रांसफर करने से पहले जरूरी सावधानी बरते वरना आपका बैंक अकाउंट खाली हो सकता है।

 दान देने से पहले रहे अलर्ट

दान देने से पहले रहे अलर्ट

SBI ने ट्वीट कर अपने खाताधारकों को अलर्ट किया है और कहा है कि अगर आप बाढ़ पीड़ितों की मदद करना चाहते हैं, तो सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आप ऑफिशियल रिलीफ फंड वर्चुअल पेमेंट एड्रेस के जरिए ही डोनेशन दें। बैंक ने कहा है कि अगर आपके पास डोनेशन के लिए कोई रिक्वेस्ट आता है तो आप पहले उसे वेरीफाई करें। बिना वेरीफाई किए ऑफिशियल वर्चुअल पेमेंट एड्रेस पर पैसे ट्रांसफर करने से हमेशा बचना चाहिए। ऐसा न करने पर आप धोखाधड़ी के शिकार हो सकते हैं।

 खाली हो सकता है आपका अकाउंट

खाली हो सकता है आपका अकाउंट

एसबीआई ने अपने खाताधारकों से कहा है कि वो दान देने से पहले जांच कर लें कि वो किस अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर रहे हैं। बैंक ने कहा है कि बाढ़ पीड़ितों की मदद के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले अपराधी फेक लिंक शेयर कर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं और उनका अकाउंट कर बिना खाताधारक की जानकारी के उनके खाते से पैसे निकाल लेते हैं। बैंक ने कहा है कि ऐसे किसी भी लिंक पर क्लिक न करें जोकि किसी अज्ञात स्रोत से ई-मेल के माध्यम से आया हो। बैंक ने खाताधारकों को सावधान करते हुए कहा है कि बाढ़ राहत के नाम पर लोगों को 'फिशिंग हमले' का शिकार बनाया जा रहा है।

 इन बातों को रखें ख्याल

इन बातों को रखें ख्याल

बैंक ने खाताधारकों से कहा है कि वो पॉप-अप विंडो में खुलने वाले किसी भी पेज पर कोई भी जानकारी न दें। किसी के भी पूछने पर फोन पर अपने बैंक खाते से संबंधित गोपनीय जानकारी जैसे की बैंक अकाउंट नंबर, पिन, ओटीपी जैसी जानकारी साझा न करें। कभी भी नेट बैकिंग लॉगइन करने से पहले जांच ले कि 'https://'text के साथ शुरू होता है और यह 'http://' नहीं है। बैंक कभी भी किसी भी खाताधारक से फोन या ईमेल के जरिए उनके खाते से संबंधित गोपनीय जानकारी नहीं पूछता। ऐसे में फिशिंग हमले से सतर्क रहना जरूरी है।

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