बाजार में जोखिम बढ़ा है लेकिन माइक्रोइकोनॉमिक्स बेहतर हुई: RBI Survey
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी सर्वे रिपोर्ट को जारी कर दिया है। आरबीआई की 23वीं सिस्टमैटिक रिस्क सर्वे को नवंबर 2022 में किया गया था।

भारतीय रिजर्व बैंक ने सिस्टमैटिक रिस्क सर्वे की ताजा रिपोर्ट को जारी किया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय बाजार, वैश्विक आर्थिक संकट बढ़ा है, लेकन मैक्रोइकोनोमिक्स की स्थिति बेहतर हुई है। सर्वे में जिन लोगों ने हिस्सा लिया उनका कहना है कि भारतीय वित्त व्यवस्था मजबूत है। संस्थानों में जोखिम की स्थिति बनी हुई है। अर्थव्यवस्था में जिस तरह से मौद्रिक स्तर पर सख्ती बरती जा रही है, वित्तीय हालात सख्त हुए हैं, वैश्विक जोखिम बढ़ा है, वैश्विक विकास में अनिश्चितता बढ़ी है, क्रिप्टोकरेंसी और पर्यावरण में बदलाव ने वैश्विक, वित्तीय बाजार में जोखिम को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
सर्वे में हिस्सा लेने वाले अधिकतर लोगों को भरोसा है कि आने वाले समय में स्थिति बेहतर होगी। भारत की अर्थव्यवस्था ठीक होगी। साथ ही लोगों को भरोसा है कि भारत के बैंकिंग सेक्टर स्थिर होंगे। तकरीबन 90 फीसदी लोग जिन्होंने इस सर्वे में हिस्सा लिया उनका कहना है कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर बेहतर होगा या पिर आने वाले एक साल में ऐसे ही बना रहेगा, इसमे कोई बदलाव नहीं होगा।
आरबीआई की 23वीं सिस्टमैटिक रिस्क सर्वे को नवंबर 2022 में किया गया था। सर्वे में लोगों से देश की वित्तीय स्थिरता, जोखिम को लेकर अलग-अलग सेक्टर के सवाल पूछे गए थे। जिसमे लोगों का कहना है कि आरबीआई की सख्त मौद्रिक नीति का असर रवित्तीय व्यवस्था पर देखने को मिलेगा। तकरीबन 50 फीसदी लोगों का मानना है कि आने वाले एक साल में भारतीय बैंकिंग सेक्टर बेहतर होगा, पिछले एक साल में यह काफी बेहतर हुआ है।
सर्वे के अनुसार लोगों को भरोसा है कि वैश्विक वित्तीय स्थिति पहले से बेहतर होगी, जोकि पिछले छह महीनों में नीचे गई है। तीन चौथाई लोगों का कहना है कि सख्त मौद्रिक नीति के चलते एक्सचेंज रेट बढ़ेंगे, कैपिटल फ्लो, फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व और बॉन्ड यील्ड पर असर होगा। 40 फीसदी लोगों का कहना है कि बैंकों के मुनाफे पर और कर्ज पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।












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