2000 रुपए का नोट: RBI ने मई 2016 में दी थी मंजूरी, 500-1000 का नोट बंद करने पर नहीं हुई थी बात
भारतीय रिजर्व बैंक ने बताया है कि केंद्रीय बोर्ड ने 2000 रुपए के नए नोट को बाजार में उतारने के प्रस्ताव को मई, 2016 में ही मान लिया था।
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक ने बताया है कि केंद्रीय बोर्ड ने 2000 रुपए के नए नोट को बाजार में उतारने के प्रस्ताव को मई, 2016 में ही मान लिया था। इस बात की जानकारी आरबीआई ने वित्तीय मामलों की स्थायी समिति को एक पत्र के जरिए दे दी थी। इंडियन एक्सप्रेस को आरटीआई के जरिए दी गई जानकारी में आरबीआई ने बताया है कि 2000 रुपए के नोट को मंजूरी देते समय 500-1000 रुपए के नोट को बंद करने संबंधी कोई बात नहीं की गई थी। आरटीआई में बताया गया है कि आरबीआई ने 19 मई, 2016 को 2000 रुपए का नया नोट जारी करने संबंधी निर्णय लिया था।

आरबीआई से पूछा गया कि क्या रिजर्व बैंक सेंट्रल बोर्ड को सरकार ने 500 और 1000 के नोट बंद करने संबंध में कोई भी प्रस्ताव भेजा गया था? इसके जवाब में आरबीआई ने उत्तर देते हुए बताया कि 8 नवंबर 2016 को हुई बैठक में आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड ने 500 और 1000 रुपए के नोट को लीगल टेंडर से हटाने के प्रस्ताव की सिफारिश की थी। पर भारतीय रिजर्व बैंक ने 8 नवंबर को हुई इस बैठक के समय के विषय में जानकारी नहीं दी है। इसके अलावा आरबीआई ने इस पर भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया कि क्या सितंबर 2016 में अपने कार्यकाल खत्म होने से पहले उस समय के आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने सरकार को 500 के नोट को बंद करने के खिलाफ कोई पत्र लिखा था। वहीं आरबीआई ने 8 नवंबर, 2016 को हुई बैठक के मिनट्स देने से इंकार कर दिया है। आरबीआई ने कहा कि आरटीआई एक्ट 2005 की डिस्क्लोजर अधिनियम 8(1)(ए) के तहत जानकारी देने से मना कर दिया।Read Also: नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत बोले-एटीएम और डेबिट-क्रेडिट कार्ड भी साल 2020 तक हो जाएंगे बेकार
आपको बताते चलें कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को विमुद्रीकरण के फैसले का ऐलान किया था। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इस फैसले को लेने में 10 महीने का समय लिया गया। इससे पहले वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 5000-10000 रुपए के नोट जारी करने को लेकर आरबीआई ने सरकार को सिफारिश की थी। पर बाद में सरकार ने इस सिफारिश का मानने से इंकार कर दिया था। आरटीआई में सवाल के जवाब में आरबीआई ने यह जानकारी भी दी थी कि आठ नवंबर, 2016 को जब यह फैसला किया गया तो आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल, डिप्टी गवर्नर आर गांधी, एसएस मुंद्रा, भारत सरकार में आर्थिक मामलों के सचिव शशिकांत दासा, डीएफएस सचिव अंजुले चिब दुग्गल, भारत दोषी, नचिकेत मोर और पूर्व नौकरशाह सुधीर मांकड मौजूद थे।
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