RBI ने रेपो दर 6.5% पर की स्थिर, रियल स्टेट पर कैसा होगा असर? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

आरबीआई ने रेपो दर को 6.5% पर स्थिर रखकर बड़ी राहत दी है। लेकिन आरबीआई के इस निर्णय का रियल स्टेट पर क्या असर होगा? इसको लेकर एक्सपर्ट्स बड़ी उम्मीद व्यक्त की है।

RBI repo rate fixed at 6.5

भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने नीतिगत रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय क्षेत्र मजबूत हुआ है। वहीं फाइनेंशियल एक्पर्ट्स के मुताबिक आरबीआई का ये निर्णय अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति में कमी और आगे भी गिरावट की संभावना के चलते आया है।

रेपो दर का ऐलान करते हुए गुरुवार को रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि मु्द्रास्फीति की स्थिति का बारीकी से विश्लेषण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य से मुख्य मुद्रास्फीति चार प्रतिशत अधिक है। उन्होंने अनुमान व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष मुद्रास्फीति इसी स्तर पर बने रहने की उम्मीद है।

क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
फाइनेंशियल एक्पर्ट्स के मुताबिक रेपो रेट में लगातार बढ़ोतरी के कारण निम्न या फिर मध्यम वर्ग की आय वर्ग के घर खरीदना मुश्किल हो गया था। लेकिन इस पर रेपो दरों में स्थिरता उनके लिए उम्मीद की किरण है। पिछले वर्ष मई (मई 2022) की तुलना में अब तक केंद्रीय बैंक ने कुल 6 बार रेपो रेट में इजाफा किया था। जिसके चलते रेपो दर बढ़कर 6.50% पहुंच गई। जिसका सीधा असर लोन की ब्याज दरों पर पड़ा था। लेकिन अप्रैल 2023 से ही आरबीआई ने रेपोर दर 6.50 फीसदी पर स्थिर रखी है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक रेपो दर 260 से अधिक सेक्टर्स पर असर डालती हैं। ब्याज दरों के स्थिर होने से अब होम लोन का बोझ कम होगा। ऐसे में रियल एस्टेट सेक्टर्स को बड़ा फायदा होगा। इसके साथ ही आरबीआई के इस फैसले से ग्राहकों की ईमआई पर ब्याज के बढ़ते बोझ की चिंता भी कम होगी।

फेस्टिव सीजन में पॉजिटिव असर
कुछ एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि 18 महीने की सबसे कम महंगाई दर के बाद आने वाले वक्त में आरबीआई रेपो रेट में कटौती भी कर सकता है। ऐसे में लोगों को सस्ती होम लोन का फायदा मिलेगा। आने वाली फेस्टिव सीजन में इसका असर दिखना शुरू हो सकता है। रेपो दरों के स्थिर होने से खुदरा महंगाई (Retail Inflation) में भारी कमी देखी जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक जीडीपी वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आठ प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में छह प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रहेगी। जबकि चालू वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को 5.2 प्रतिशत से घटाकर 5.1 प्रतिशत होगी। आरबीआई ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा मांग बेहतर हो रही है।

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