RBI MPC की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक 7 अप्रैल से शुरू, विकास को समर्थन या महंगाई से लड़ाई?
RBI MPC Meeting: रिजर्व बैंक की MPC मीटिंग सोमवार 7 अप्रैल से शुरु होगी, जो नये फाइनेंशिल ईयर 2025-26 की पहली बैठक है इसमें भारत की मौद्रिक नीति पर चर्चा होगी। हर दो महीने में होने वाली यह मीटिंग 9 अप्रैल को समाप्त होगी जिसमें सुबह 10 बजे गवर्नर संजय मल्होत्रा 6 सदस्यों वाली टीम का निर्णय बताएंगे।
यह बैठक भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है और विशेषज्ञ एक अच्छे परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि इसके जरिये यह तय होगा कि देश की मौद्रिक नीति आगे कैसी दिशा लेगी?, क्या केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में और कटौती करेगा या महंगाई को देखते हुए सतर्क रुख अपनाएगा?

क्या है मौद्रिक नीति समिति? महंगाई पर आरबीआई का लक्ष्य क्या है? और भारत में मुद्रास्फीति की क्या है स्थिति? आईए विस्तार से जानते हैं...
RBI MPC में कितने सदस्य, इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee - MPC) में छह सदस्य होते हैं। इसमें RBI के गवर्नर सहित तीन आंतरिक सदस्य और केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त तीन स्वतंत्र बाहरी विशेषज्ञ शामिल होते हैं। MPC का मुख्य उद्देश्य देश में मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, साथ ही वह आर्थिक विकास का भी समर्थन करती है।
MPC का मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास का समर्थन करते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना है। RBI का लक्ष्य मुद्रास्फीति को 2% से 6% के बीच बनाए रखना है, जिसमें 4% का मध्यवर्ती लक्ष्य है। यह लक्ष्य दीर्घकालिक स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित किया गया है।
RBI MPC की 2025-26 में प्रस्तावित बैठकें
RBI हर वित्तीय वर्ष में छह द्विमासिक बैठकें करता है। इस साल अन्य पाँच बैठकें 4-6 जून, 5-7 अगस्त, 29 सितंबर-1 अक्टूबर, 3-5 दिसंबर और 4-6 फरवरी को निर्धारित हैं। इन बैठकों में ब्याज दरें, मुद्रा आपूर्ति, मुद्रास्फीति की स्थिति और अन्य व्यापक आर्थिक संकेतकों पर विचार किया जाता है।
RBI की पिछली बैठकें और दर कटौती का संकेत
आरबीआई की पिछली बैठक 7 फरवरी 2025 को हुई थी, जिसमें समिति ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 25 आधार अंकों (bps) से घटाकर 6.25% कर दिया था। यह लगभग 5 वर्षों में पहली बार था जब दरों में कटौती की गई। इससे पहले, मई 2022 से लेकर अब तक RBI ने रेपो दर को 6.5% पर बनाए रखा था, जो मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए एक सख्त रुख था।
रेपो दर
रेपो दर वह प्रमुख दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है। इस दर में बदलाव का सीधा प्रभाव बैंकों की उधारी लागत और आम नागरिकों के कर्ज पर पड़ता है।
RBI MPC Meeting: भारत में मुद्रास्फीति की स्थिति
मुद्रास्फीति को आसान भाषा में समझें तो इसका सिधा अर्थ है महंगाई...और कई देशों के लिए ये एक गंभीर विषय भी है। दुनियाभर में कई विकसित अर्थव्यवस्थाएं अभी भी महंगाई से जूझ रही हैं लेकिन भारत काफी हद तक अपनी मुद्रास्फीति की गति को नियंत्रित करने में कामयाब रहा है। इसके पीछे प्रमुख वजह RBI की सतर्क मौद्रिक नीति और वैश्विक खाद्य व तेल कीमतों में स्थिरता रही है।
ब्याज दरों में वृद्धि एक मौद्रिक नीति साधन है जो आम तौर पर अर्थव्यवस्था में मांग को दबाने में मदद करता है, जिससे मुद्रास्फीति दर में गिरावट आती है। मार्केट विश्लेषक और रेटिंग एजेंसियाँ इस बार के फैसले को लेकर खासा आशावादी हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा ने हाल ही में एक रिपोर्ट में दावा किया कि वर्ष 2025 में RBI रेपो दर में कुल 75 आधार अंकों की कटौती कर सकता है।
वहीं, केयर एज रेटिंग्स ने यह अनुमान जताया कि अप्रैल की इस पहली बैठक में RBI रेपो दर में एक और 25 bps की कटौती कर सकता है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अब RBI का फोकस मुद्रास्फीति से हटकर विकास को समर्थन देने की ओर हो सकता है।












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