आर्थिक गतिविधियों में सुधार, लेकिन वित्त वर्ष 2020-21 में निगेटिव रहेगी जीडीपी ग्रोथ रेट: RBI गवर्नर
नई दिल्ली। कोरोना वायरस संकट के बीच देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए आज भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने प्रेस कॉन्फ्रेस कर कई बड़े ऐलान किए। बता दें कि तीन दिनों तक चली रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक आज खत्म हो गई है, इस मीटिंग में देश की जीडीपी से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। गुरुवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, कोरोना वायरस की मार के बाद अब देश की इकोनॉमी ट्रैक पर लौट रही है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी अब भी कमजोर है। हालांकि, विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़त का सिलसिला जारी है।
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कोरोना काल में भारत की जीडीपी ग्रोथ पर बात करते हुए आरबीआई गवर्नर ने एक बार फिर कहा है कि वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी ग्रोथ रेट निगेटिव रहेगी। उन्होंने कहा, सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए वर्ष की पहली छमाही में जीडीपी वृद्धि कम रहने का अनुमान है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने आगे कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के मुताबिक भारत में भी आर्थिक गतिविधियों में सुधार होना शुरू हो गया था लेकिन फिर से कोरोना मामलों की बढ़ती संख्या ने लॉकडाउन करने पर मजबूर कर दिया है। इसके चलते अर्थव्यवस्था में रिकवरी की उम्मीदों को झटका लगा है।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कोविड-19 की वजह से इस साल की पहली छमाही में महंगाई दर में वृद्धि की उम्मीद है। हालांकि, दूसरी छमाही में इसमें कमी आने की उम्मीद है। गौरतलब है कि देशभर से कोरोना वायरस के प्रतिदिन सामने आ रहे नए केस अब अमेरिका और ब्रजील से भी अधिक हो गए हैं। इसके चलते देश में कई स्थानों पर फिर से सख्त लॉकडाउन लगाना पड़ा है। गवर्नर ने आगे कहा, इस साल जून में वार्षिक महंगाई दर मार्च के 5.84 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 6.09 फीसदी रह गई, जो केंद्रीय बैंक के मीडियम टर्म टारगेट से अधिक है, आरबीआई का टारगेट दो से छह फीसदी है। उन्होंने कहा, हम ग्रोथ में तेजी लाने के लिए भरपूर प्रयास कर रहे हैं, हमारी कोशिश है कि कोरोना के असर के असर को कम से कम किया जाए।
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