तो इसलिए कर्ज सस्ता नहीं कर पाए आरबीआई गवर्नर

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नई दि‍ल्‍ली। देश में 'अच्छे दिन' आने के बाद आरबीआई ने अपनी पहली बार अपनी मौद्रि‍क नीति‍ घोषि‍त में कर्ज सस्‍ता नहीं किया क्‍यों कि महंगाई अब भी चिंताजनक बनी हुई है। महंगाई पर नियंत्रण आरबीआई की प्राथमि‍कताओं में से एक है और इसकी दर अब भी चिंताजनक है।

राजन ने उपभोक्ता महंगाई दर को वित्त वर्ष के अंत तक 8 फीसदी और अगले वित्त वर्ष तक 6 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा है। वहीं, देश में अल नीनो का जोखि‍म भी बढ़ता जा रहा है जो खाद्य वस्‍तुओं की कीमतों में इजाफा कर सकता है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई (जो अप्रैल में बढ़ी थी) जनवरी-मार्च 2015 तक धीरे-धीरे घटकर 8 फीसदी या इससे नीचे आ सकती है, जैसा कि मौद्रिक नीति पर ऊर्जित पटेल की समिति ने अनुमान लगाया है।

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नरेंद्र मोदी की अगुवाई में नई सरकार आने के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपया तेजी से मजबूत हुआ है। इस हालत में आरबीआई को लगातार बाजार से डॉलर की खरीद करनी पड़ रही है। बाजार से मुद्रा प्रवाह को संतुलि‍त करने के लि‍ए आरबीआई को यह कदम उठाने पड़ रहे हैं जो‍ महंगाई को हवा देने का काम कर रहा है। ऐसे में ब्‍याज दर कम करना जोखि‍म भरा हो सकता है।

बैंकों की स्‍थि‍ति‍ भी खास अच्‍छी नहीं है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एनपीए सितंबर 2013 की समाप्ति पर बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपए हो गया। इससे पहले 31 मार्च 2013 को यह 1.55 लाख करोड़ रुपए पर था। यदि‍ बैंकों को सस्‍ते कर्ज का तोहफा दे दि‍या गया तो वह खुल इसका इस्‍तेमाल कर सकते हैं। ये भी आरबीआई के लि‍ए चिंता का सबब बन सकता है।

हालांकि राजन के फैसलों से अब तक अर्थव्यव्स्था में सुधार के कदम तेज हुए हैं, व मोदी सरकार के बाद से बदलाव की उम्मीद तो नजर आई है पर अब तक महंगाई को लेकर असमंजस बरकरार है।

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