RBI ने इस्लामिक बैंकिंग के लिए खोले रास्ते, सरकार को दिया प्रस्ताव
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सरकार के साथ मिलकर ब्याज मुक्त बैंकिंग शुरू करने का प्रस्ताव दिया है।

इस बैंकिंग की शुरूआत करने का प्रस्ताव इसलिए लाया गया है ताकि धार्मिक कारणों से बैंकिंग सिस्टम से दूर रहने वाले लोगों को भी इसका हिस्सा बनाया जा सके।
इस तरह की बैंकिंग को इस्लामिक फाइनेंस या इस्लामिक बैंकिंग भी कहा जाता है।
सालाना रिपोर्ट में बनाया प्रस्ताव
अपने सालाना रिपोर्ट में आरबीआई ने बीते सप्ताह यह प्रस्ताव बनाया है।
यह प्रस्ताव बैंक के बीते राय से अलग है जिसमें कहा गया था कि इस्लामिक फाइनेंस नॉन बैंकिंग चैनल्स की तरफ से निवेश या कोआपरेटिव के जरिए ऑफर किया जा सकता है।
वहीं अपनी साल 2015-16 की वार्षिक रिपोर्ट में केंद्रीय बैंक ने कहा है कि बैंकिंग सिस्टम से अलग रह रहे लोगों को इससे जोड़ने के लिए सरकार के साथ विचार विमर्श कर ब्याज मुक्त बैंकिंग सिस्टम लाने के तरीकों को खोजने का प्रस्ताव किया गया है।
देश के दूसरे सबसे बड़े धर्म के करीब 18 करोड़ मुस्लिम बैंकिंग सिस्टम से नहीं जुड़ पाते थे क्योंकि सभी सिस्टम ब्याज आधारित हैं। बता दें कि ब्याज आधारित बैंकिंग इस्लाम में प्रतिबंधित है।












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