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PhonePe IPO: अभी नहीं, तो कब? फोन पे के आईपीओ पर ब्रेक, समीर निगम ने बताया क्यों रुकी लिस्टिंग

PhonePe IPO: भारत की बड़ी डिजिटल पेमेंट कंपनी फोनपे (PhonePe) ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) को फिलहाल रोकने का फैसला किया है। कंपनी ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक हालात, खासकर मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष और उससे पैदा हुई अनिश्चितता को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने साफ किया है कि जैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्थिति सामान्य होगी, वह भारत में पब्लिक लिस्टिंग की प्रक्रिया फिर से शुरू करेगी। फोनपे का आईपीओ भारतीय फिनटेक सेक्टर के सबसे बड़े इश्यू में से एक माना जा रहा था, इसलिए इस फैसले ने बाजार का ध्यान खींचा है।

PhonePe IPO

PhonePe के CEO ने क्या कहा

फोनपे के सीईओ समीर निगम ने कहा कि कंपनी सभी प्रभावित क्षेत्रों में जल्द शांति की उम्मीद करती है। उन्होंने बताया कि कंपनी भारत में लिस्ट होने के अपने लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध है। समीर निगम के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए फिलहाल आईपीओ प्रक्रिया को रोकना बेहतर फैसला माना गया है। हालात सुधरने के बाद कंपनी दोबारा आईपीओ की तैयारी शुरू करेगी।

हाल ही में मिली थी SEBI की मंजूरी

कुछ हफ्ते पहले ही फोनपे को सेबी (SEBI) से नियामकीय मंजूरी मिली थी। कंपनी ने अपना अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस भी दाखिल किया था। इस आईपीओ को पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में लाने की योजना थी। यानी मौजूदा निवेशक अपने शेयर बेचने वाले थे।

बड़े निवेशक बेचने वाले थे हिस्सेदारी

इस इश्यू में फोनपे के प्रमुख निवेशक जैसे वॉलमार्ट, टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट अपनी हिस्सेदारी बेचने वाले थे।रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी का लक्ष्य करीब 86,500 करोड़ रुपये से 97,500 करोड़ रुपये के बीच वैल्यूएशन हासिल करना था।

PhonePe: UPI बाजार में मजबूत पकड़

फोनपे भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) सिस्टम के सबसे बड़े प्लेटफॉर्म में से एक है। इसके पास देशभर में करोड़ों रजिस्टर्ड यूजर्स हैं। इसी वजह से इसका आईपीओ लंबे समय से बाजार में चर्चा का विषय बना हुआ था और इसे फिनटेक सेक्टर की बड़ी लिस्टिंग माना जा रहा था।

बाजार पर वैश्विक हालात का असर

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला है। तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण बाजार में दबाव बना हुआ है। इसी वजह से इस साल आईपीओ बाजार भी कमजोर नजर आ रहा है। इस साल आए 10 आईपीओ में से 6 अपने इश्यू प्राइस से नीचे लिस्ट हुए हैं।

इन लिस्टिंग का औसत रिटर्न करीब 2 प्रतिशत रहा है, जबकि 2025 की शुरुआत में आए आईपीओ औसतन 16.5 प्रतिशत तक की लिस्टिंग बढ़त दे रहे थे।

With AI Inputs

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