Petrol Price: इन शहरों में पेट्रोल 100 के पार, अभी राहत मिलने के आसान नहीं, जानें क्या कहती है रिपोर्ट

Petrol Price: इन शहरों में पेट्रोल 100 के पार, अभी राहत मिलने के आसान नहीं, जानें क्या कहती है रिपोर्ट

नई दिल्ली, जून 27। पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूती जा रही है। देश के कई हिस्सों में पेट्रोल के दाम 100 रुपए के आंकड़ें के पार कर गए हैं तो कई शहरों में इसके करीब पहुंच गए हैं। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण रविवार को भी पेट्रोल-डीजल की कीमत में बढ़ोतरी देखने को मिली। बिहार में आज पेट्रोल का दाम 100 रुपए के पार हो गया। वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब तक के सबसे उच्चतम मूल्य पर पहुंच गया है। वहीं ताजा रिपोर्ट की माने तो अभी पेट्रोल की कीमतों में राहत मिलती भी नहीं दिख रही है।

 पेट्रोल 100 रुपए के पार

पेट्रोल 100 रुपए के पार

राजधानी दिल्ली में रविवार को पेट्रोल 98.46 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है, जबकि डीजल 88.90 रुपये प्रति लीटर पर रहा। वहीं देश के कई राज्यों में पट्रोल की कीमत 100 रुपए के पार हो गई। इनमें राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, तमिलनाडु , बिहार जैसे राज्य हैं, जहां पेट्रोल की कीमत 100 रुपए के पार हो गई।

 अभी नहीं मिलेगी राहत

अभी नहीं मिलेगी राहत

पेट्रोल-डीजल की कीमतों के मामले में अभी आने वाले दिनों में राहत मिलती नहीं दिख रही है। बैंक ऑफ अमेरिका की ताजा रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2022 तक तल की कीमत 100 डॉलर के पार हो जाएगी, यानी ईंधन के दाम 7200 रुपए बैरल के करीब पहुंच जाएगा। यानी अगर अंतरर्राष्ट्रीय बाजार में अगर तल के दाम बढ़े, तो भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकेगा।

 क्या कहती है रिपोर्ट

क्या कहती है रिपोर्ट

बैंक ऑफ अमेरिका की इस रिपोर्ट को रूसी न्यूज एजेंसी तास ने प्रकाशित किया गया है, जिसमें कहा गया है कि साल 2022 तक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार हो जाएगी। यानी 159 लीटर तेल के लिए भारतीय करेंसी में 7200 रुपए चुकाने होंगे। ये क्रूड ऑयल की कीमत ह, जिसमें रिपाइनिंग, ट्रांसपोर्ट आदि खर्च और जुड़ेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक तेल की कीमतें आने वाले दिनों में बढ़ेगी। रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना के कारण तेल उत्पादन रुका था, मांग के मुताबिक सप्लाई कम रहा, जिसके कारण कीमतों पर दवाब बढ़ता चला गया। वहीं कोरोना के कारण लोग अब तक घरों पर थे। गाड़ियां बंद थी, तेल की खपत कम थी, लेकिन अब फिर से सब खुलने लगा है, जिसक कारण तेल की मांग में तेज वृद्धि देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक स्थिति को देखते हुए कई देश पहले से रिजर्व अपना तेल खपत कर रहे हैं, जिसकी भी एक सीमा है। तेल रिजर्व खत्म होने के साथ ही इसे इमरजेंसी के लिए भरना होगा। यानी अगले कुछ महीनों में मांग और बढ़ेगी। मांग बड़ने के साथ ही कीमतों में तेजी आएगी। बैंक ऑफ अमेरिका ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि साल 2022 तक येे तजी रह सकती है।

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