Petrol Diesel: सरकार का बड़ा फैसला! पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में की कटौती, क्या आम जनता को मिलेगी राहत?

Petrol Diesel Excise Duty Cut: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग को तीन हफ्तों से ज्यादा समय बीत चुका है। युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा संकट (Global Energy Crisis) को देखते हुए केंद्र सरकार ने शुक्रवार को एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में भारी कटौती का ऐलान किया है।

पेट्रोल पर ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये और डीजल पर 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दी गई है। यह फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईंधन की कीमतें बढ़ने की आशंकाएं तेजी से बढ़ रही हैं।

Petrol-Diesel

इस संघर्ष ने ग्लोबल एनर्जी स्ट्रक्चर को प्रभावित किया है, क्योंकि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर पूरी तरह से नाकेबंदी कर दी है। होर्मुज़ एक अहम समुद्री रास्ता है। भारत के 90% कच्चे तेल का आयात इस रास्ते से होता है। अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान कच्चे तेल के अहम स्ट्रक्चर पर बमबारी और मिसाइल हमले भी हुए हैं, जिसमें सऊदी अरब के रास लफ़ान इंडस्ट्रियल सिटी को निशाना बनाया गया है।

क्या आम जनता को मिलेगी राहत?

सरकार के इस ऐतिहासिक कदम का सीधा लाभ जनता को तभी मिलेगा, जब तेल कंपनियां (OMCs) कच्चे तेल से हो रहे अपने 48.8 रुपए प्रति लीटर के भारी घाटे को इस कटौती से एडजस्ट करने के बजाय कीमतों में कमी करें, जिससे न केवल ईंधन सस्ता हो सकता है बल्कि अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा महंगाई का बोझ भी कम होगा।

भारत के पास कितना है स्टॉक?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की कमी नहीं है और घबराने (Panic Buying) की जरूरत नहीं है।

  • तेल का भंडार: भारत के पास वर्तमान में लगभग 74 दिनों का तेल भंडार (SPR और OMCs का स्टॉक मिलाकर) मौजूद है।
  • LPG की स्थिति: देश के 33 करोड़ परिवारों के लिए राहत की खबर है कि हमारे पास 30 दिनों का LPG सिलेंडर स्टॉक उपलब्ध है। सरकार ने घरेलू उत्पादन में 25% बढ़ोतरी के निर्देश भी दिए हैं।
  • विकल्पों की तलाश: पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने संसद में बताया कि सरकार कच्चे तेल और LPG के आयात के लिए नए देशों के साथ कॉन्ट्रैक्ट (Contracts) तेजी से साइन कर रही है ताकि सप्लाई में कोई रुकावट न हो।

कैसे घटते-बढ़ते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

ईंधन की कीमतें कच्चे तेल (Crude Oil) और डॉलर के रेट से तय होती हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से मंगवाता है। इसलिए विदेशी युद्ध का असर सीधा आपकी जेब पर पड़ता है।

  • कच्चे तेल की कीमतें (Crude Oil Prices): भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है।
  • विदेशी मुद्रा दर (Foreign Exchange Rates): कच्चे तेल का व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है। यदि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो आयात महंगा हो जाता है, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ जाती हैं।
  • सरकार के कर (Government Taxes): केंद्र और राज्य सरकारें ईंधन पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) और वैट (VAT) लगाती हैं। इन करों की दर अलग-अलग राज्यों में भिन्न होती है, जो कीमतों में अंतर का मुख्य कारण है।
  • रिफाइनिंग और परिवहन लागत (Refining and Transportation Costs): कच्चे तेल को रिफाइन करने और पेट्रोल पंपों तक पहुंचाने की लागत भी अंतिम कीमत में जोड़ी जाती है।
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