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भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार हुई धीमी, मार्च तिमाही में GDP गिरकर हुई 4.1% , सालभर में 8.7% ग्रोथ

नई दिल्ली, 31 मई। जनवरी मार्च तिमाही में भारत की जीडीपी की रफ्तार धीमी हो गई। मार्च तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की दर 4.1 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि सालभर में जीडीपी ग्रोथ रेट 8.7 प्रतिशत रही। इसे भारतीय अर्थव्यवस्था में एक नकारात्मक सुधार की दृष्टि से देखा जा रहा है।

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मार्च तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में 4.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जबकि भारत ने गत वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान विकास की दर 8.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी। वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए आर्थिक वृद्धि 6.6 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि पर सुधार है। यह जीडीपी रेट 2020-21 में दर्ज की गई थी। जबकि वित्तीय वर्ष 2021-22 की मार्च तिमाही की 4.1 प्रतिशत की वृद्धि भी बेहतर है। यह वित्तीय वर्ष 2020-21 की मार्च तिमाही की तुलना में .6 प्रतिशत अधिक है।

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    केंद्र सरकार ने गत वित्तीय वर्ष (2021-22 के लिए जीडीपी (GDP Growth Rate) के आंकड़ें जारी किए हैं। वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 8.7 फीसदी रही। चौथी तिमाही में आर्थिक बाधाएं के चलते ग्रोथ रेट 4.1 फीसदी दर्ज की गई। भारत सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार तीसरी तिमाही में यह दर 5.4 फीसदी थी। इससे पहले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.5 फीसदी और पहली तिमाही में 20.3 फीसदी रही थी। जबकि चौथी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ गिरकर 4.1 हो गई।

    अनुमान से कम रही जीडीपी ग्रोथ
    वित्त वर्ष 2021-22 में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 8.7% रही। जबकि सरकार का अनुमान 8.9 फीसदी ग्रोथ रेट का था। जनवरी में ओमिक्रॉन के मामलों में वृद्धि से कोरोना महामारी से जुड़े कुछ प्रतिबंध फिर से लागू करने पड़े थे। वहीं फरवरी में यूक्रेन में युद्ध ने इसके संकट को और बढ़ा दिया था।

    अनुमान से राजकोषीय घाटा कम
    वित्त वर्ष 2021-22 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 6.71 फीसदी पर रहा। मंगलवार को जारी वित्तीय आंकडों के मुताबिक सरकार ने पहले इसके 6.8 फीसदी पर रहने का पूर्वानुमान जताया था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 6.9 फीसदी कर दिया गया था। महालेखा नियंत्रक (CGA) के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए राजकोषीय घाटा 15,86,537 करोड़ रुपये रहा।

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