India US Deal: स्वदेशी इंजन को बढ़ावा! DRDO की लैब को अमेरिकी तकनीक मिलने के आसार, NATO के पास भी नहीं
भारत की गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE)- स्वदेशी इंजनों के विकास से जुड़ी डीआरडीओ प्रयोगशाला है। भारत में जेट इंजनों के निर्माण के लिए अमेरिका की जीई के साथ प्रस्तावित सौदे में GTRE भी हिस्सेदार होगी।
सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इस सहयोग और समझौते से GTRE को जेट इंजन क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने में मदद मिलेगी। बता दें कि अमेरिका से भारत ड्रोन का भी अहम सौदा करने वाला है।

अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी कंपनी एक "अभूतपूर्व कदम" के तहत इंजनों के लिए मैनुफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी साझा कर रही है। जेट इंजन की लागत के हिसाब से ये 80 प्रतिशत है।
DRDO लैब पहले भी इंजन बना चुकी है
गौरतलब है कि जीटीआरई बेंगलुरु की लैब है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के तहत काम करने वाली इस प्रयोगशाला में ही कावेरी इंजन विकसित हुआ है। मूल रूप से हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस में इसी इंजन का इस्तेमाल हुआ है।
रक्षा मामलों के जानकार बताते हैं कि परियोजना में देरी के कारण, भारत को शुरुआती 113 एलसीए विमानों के लिए जीई-404 इंजन और एलसीए मार्क 2 के लिए जीई-414 और भारत में उत्पादित होने वाली पांचवीं पीढ़ी के विमानों के लिए मजबूर होना पड़ा।
भारत में बनेंगे इंजन के पुर्जे
सरकारी अधिकारियों ने कहा, समय बीतने के साथ-साथ प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण (टीओटी) का प्रतिशत और बढ़ने की उम्मीद है। अमेरिकी कंपनी से टेक्नोलॉजी मिलने के साथ ही जेट इंजन से जुड़े पुर्जे भारत में ही बनाए जाएंगे।
भारत में जेट इंजन उत्पादन के संबंध में समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, जीटीआरई को क्रिस्टल ब्लेड बनाने जैसी प्रक्रियाओं और कोटिंग्स सहित तमाम तकनीकी जानकारी मिलेगी।
NATO सहयोगियों के पास भी नहीं ऐसी तकनीक
डील से जुड़े अधिकारियों ने का मानना है कि प्रस्तावित टीओटी अभूतपूर्व है। जीई ने इस स्तर पर टीओटी अभी तक अपने नाटो सहयोगियों के साथ भी शेयर नहीं किया है। मीडिया रिपोर्ट्स में रक्षा सूत्रों का मानना है कि भारत के पास उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान हों, ऐसी योजना है।
विमानों के भावी संस्करणों को और पावरफुल बनाने के लिए एक और बड़ा जेट विमान इंजन तैयार की योजना है। इसके लिए वह फ्रांसीसी पक्ष के साथ बातचीत कर रहा है।
प्रधानमंत्री के दौरे पर ऐलान की संभावना
हालांकि, इस मामले पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस बेहद महत्वाकांक्षी और अहम द्विपक्षीय डील का ऐलान आने वाले हफ्ते में पीएम नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान हो सकता है।












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